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धान अधिप्राप्ति में सुस्ती से किसान परेशान, सरकारी समितियां पीछे तो व्यापारी कम दाम पर कर रहे खरीद

Chikheang 2025-12-19 19:07:04 views 625
  

32 दिनों में केवल 11880 एमटी धान की हो सकी अधिप्राप्ति



जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। जिले में धान अधिप्राप्ति की रफ्तार बेहद धीमी रहने से किसान गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। फसल कटाई के बाद खलिहानों में धान रखा हुआ है, लेकिन सरकारी समितियों के माध्यम से अपेक्षित मात्रा में खरीद नहीं हो पा रही है। हालात यह हैं कि 32 दिनों में जिले की सरकारी समितियां मात्र 11,880 मैट्रिक टन धान की ही अधिप्राप्ति कर सकी हैं, जो कुल संभावित खरीद का 10 प्रतिशत भी नहीं है। इस स्थिति का फायदा निजी व्यापारी उठा रहे हैं और वे किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत पर धान खरीद रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

धान अधिप्राप्ति में तेजी लाने के लिए जिला सहकारिता पदाधिकारी लवली ने स्वयं पहल शुरू की है। बीते दो दिनों में उन्होंने 212 किसानों से 488 मैट्रिक टन से अधिक धान की खरीद कराई है।

उन्होंने बताया कि जिले की 191 पैक्स और सहकारी समितियों को 30 प्रतिशत अग्रिम राशि उपलब्ध करा दी गई है। इस राशि से करीब 30 हजार मैट्रिक टन धान की खरीद संभव है, लेकिन जमीनी स्तर पर खरीद की गति अभी भी संतोषजनक नहीं है।

किसानों का कहना है कि धान की कटनी लगभग तीन-चौथाई पूरी हो चुकी है। कटाई के बाद धान खलिहानों में पड़ा है और आसमान में बादलों का डेरा होने से बारिश का डर सता रहा है।

यदि बारिश हो गई तो धान के खराब होने की आशंका है। इससे पहले मोंथा चक्रवात ने भी फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है।

तेज हवा और बारिश से कई जगह धान की फसल गिर गई, जिससे वह सड़ गई। जो फसल बची है, उसका वजन भी 25 से 28 प्रतिशत तक कम हो गया है।

ऐसे हालात में किसानों को तत्काल धान बेचने की मजबूरी है। सरकारी समितियों से धान बेचने पर 2,369 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिलती है, जबकि निजी व्यापारी केवल 1,850 रुपये प्रति क्विंटल देने को तैयार हैं।

इतना ही नहीं, धान में नमी कम होने के बावजूद व्यापारी 17 प्रतिशत आर्द्रता काटकर भुगतान कर रहे हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

हाल ही में जिला पदाधिकारी तनय सुल्तानिया की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स (अधिप्राप्ति) की बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में धान अधिप्राप्ति की प्रगति, समितियों की तैयारियों और किसानों को किए जा रहे भुगतान की विस्तृत समीक्षा की गई।

जिला सहकारिता पदाधिकारी की मांग पर धान खरीद की प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।

इसके बावजूद किसानों का कहना है कि जब तक समितियों में खरीद की रफ्तार नहीं बढ़ेगी, तब तक उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर धान बेचना पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से अधिप्राप्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाने, समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने की मांग की है।
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