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Amavasya 2026: अगले साल पड़ रही 12 अमावस्या तिथियां, सबसे खास सोमवती अमावस्या कब?

Chikheang 2025-12-19 19:06:51 views 918
  

अमावस्या 2026 तिथियां (AI-generated image)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में अमावस्या केवल एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने और स्वयं के शुद्धिकरण का दिन है। साल 2026 में कुल 12 अमावस्या की तिथियां पड़ेंगी, जिनमें सोमवती अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या का विशेष संयोग भक्तों के लिए फलदायी साबित होने वाला है। तो लिए आइए जानते हैं क्या है इसका महत्व। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
पितरों का आशीर्वाद और दान का महत्व

माना जाता है कि अमावस्या के दिन पितर (पूर्वज) धरती पर अपने वंशजों को आशीर्वाद देने आते हैं। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और गरीबों को दान देने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन के कष्टों का भी निवारण होता है। साल 2026 की शुरुआत 18 जनवरी को माघ अमावस्या से होगी, जिसे आध्यात्मिक शुद्धि के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

  
विशेष संयोग-सोमवती और शनिश्चरी अमावस्या

साल 2026 में कुछ दुर्लभ संयोग बन रहे हैं जो इस वर्ष को धार्मिक रूप से खास बनाते हैं:

1. सोमवती अमावस्या (सोमवार के दिन): यह अमावस्या विवाहित स्त्रियों के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। 2026 में यह 15 जून (ज्येष्ठ अधिक अमावस्या) और 9 नवंबर (कार्तिक अमावस्या) को पड़ेगी।

2. शनिश्चरी अमावस्या (शनिवार के दिन): शनि दोषों से मुक्ति के लिए यह दिन सर्वोत्तम है। इस साल 16 मई (ज्येष्ठ अमावस्या) और 10 अक्टूबर (आश्विन अमावस्या) को भक्त शनि देव की विशेष आराधना कर सकेंगे।

द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के मुताबिक, 2026 अमावस्या कैलेंडर की मुख्य तिथियां

1. माघ अमावस्या: 18 जनवरी (रविवार)

2. फाल्गुन अमावस्या: 17 फरवरी (मंगलवार)

3. चैत्र अमावस्या: 19 मार्च (बृहस्पतिवार)

4. वैशाख अमावस्या: 17 अप्रैल (शुक्रवार)

5. ज्येष्ठ अमावस्या: 16 मई (शनिवार - शनिश्चरी)

6. ज्येष्ठ अधिक अमावस्या: 15 जून (सोमवार)

7. आषाढ़ अमावस्या: 14 जुलाई (मंगलवार)

  

8. श्रावण अमावस्या: 12 अगस्त (बुधवार)

9. भाद्रपद अमावस्या: 11 सितंबर (शुक्रवार)

10. आश्विन अमावस्या: 10 अक्टूबर (शनिवार)

11. कार्तिक अमावस्या (दिवाली): 9 नवंबर (सोमवार - सोमवती)

12. मार्गशीर्ष अमावस्या: 8 दिसंबर (मंगलवार)


अमावस्या की रात भले ही अंधेरी हो, लेकिन यह हमें सिखाती है कि उजाले की कद्र अंधेरे में ही होती है। यह दिन आत्म-चिंतन का है। लोग अपने व्यस्त जीवन से समय निकालकर नदियों के घाटों पर जुटते हैं, दीये जलाते हैं और पूर्वजों को याद करते हैं। यह श्रद्धा ही है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती है।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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