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क्रिप्टो करेंसी से बाजार में सफेद हो रहा साइबर फ्रॉड का काला धन, ऑनलाइन गेम बना खतरनाक

LHC0088 2025-12-19 13:06:38 views 1265
  

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण



ब्रजेश पांडेय, बस्ती। मथौली-लालगंज के दिनेश कुमार का बैंक खाता चाय की दुकान पर सुजीत और दीपेंद्र ने मिलकर खोला। एक्सिस बैंक का मैनेजर बनकर हरिओम दूबे भी पहुंच गया। तीनों मिलकर दिनेश को कुछ लालच दिए और साइबर फ्रॉड का पैसा दिनेश के खाते में मंगाने लगे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

खाते में उनका मोबाइल नंबर दर्ज था। चेकबुक और एटीएम भी रख लिए। पवन विश्वकर्मा भी इस गिरोह के जाल में फंसे और इनके खाते का भी संचालन होने लगा। धन के बंटवारे में भांडा फूट गया और यह सभी जेल गए।

कनेथू बुजुर्ग सोनहा के रमेश से चार लोग मिले। बोले, मोदी जी की एक योजना आई है, खाता खुलवाकर दोगे तो एक हजार हर माह मिलेगा। चारों ने मिलकर रमेश का खाता इंडियन बैंक में खुलवाया। एटीएम और पासबुक का संचालन करने लगे। यह मामले तो महज बानगी भर है।

ऐसे ही गांव के जरूरतमंदों के नाम पर फर्जी खाते खोले गए, इस सभी खातों की जांच पुलिस जांच कर रही है, लेकिन विवेचना में जो बातें सामने आई है, वह पूरे देश की अर्थ व्यवस्था को बिगाड़कर रख दिया है।

दरअसल, साइबर फ्रॉड का यह काला धन क्रिप्टो करेंसी से बाजार में सफेद हो रहा है। साइबर एक्सपर्ट को प्राइवेट बैंकों में ऐसे संदिग्ध नंबर मिले हैं, जिसमें अचानक ज्यादा धन आता है, जो महज सात दिनों के भीतर क्रिप्टो करेंसी यूएसडीपी में बदल दिया जा रहा।

पुलिस को एक ट्रेलीग्राम ग्रुप के बारे में जानकारी मिली है, जिसके माध्यम से संदेश का आदान-प्रदान हो रहा है। गरीबों के नाम-पते से फर्जी खाते खोले जा रहे हैं। बस्ती जनपद में म्यूल खातों के सत्यापन से ऐसे 38 बैंक खाते सामने आए हैं, जिन पर देश के विभिन्न राज्यों से कुल 74 शिकायतें दर्ज हैं। चार करोड 49 लाख 61 हजार रुपये फ्रॉड का मामला पकड़ में आया।

टेलीग्राम एप के माध्यम से फर्जी एकाउंट का प्रयोग
पुलिस की छानबीन में यह मामला सामने आया है कि देश-विदेश के साइबर अपराधी टेलीग्राम एप के माध्यम से संपर्क स्थापित करते हैं। विश्वास में लेकर और कमिशन का लालच देकर इनके या इनके जानने वालों के बैंक खातों में साइबर ठगी से अर्जित धन को थोड़ा-थोड़ा भेजकर खुला मार्केट से क्रिप्टो करेंसी (बिटकोइन, यूएसडीटी आदि) खरीदने को बोलते हैं।

टेलीग्राम एप पर ऑनलाइन साइबर अपराधी टीआरसी यानी टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट का पता देकर क्रिप्टो करेन्सी को अपने क्रिप्टो वालेट जैसे पेटीएम, गुगल पे में जमा करा लेते हैं। अधिकांश वेब तीन तकनीक पर आधारित नान कस्टोडियल क्रिप्टो वालेट का इस्तेमाल करते हैं, जिस कारण उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। इस कार्य के लिए 10 प्रतिशत कमीशन का खेल होता है। आन लाइन गेम के जरिये भी खातों में जो पैसे आ रहे हैं, उसमें भी साइबर का काला धन है।

क्रिप्टो वालेट की पहचान मुश्किल
साइबर एक्सपर्ट एसआई अभिमन्यू सिंह बताते हैं कि यदि क्रिप्टो वालेट कस्टोडियल है, जैसे बाइनेन्स, वजिरएक्स, कोइन डीसीएक्स आदि, तो उसको ट्रेस करना आसान है। यह वालेट्स बैंक खातों की तरह होते हैं और कस्टोडियल एक्सचेन्ज अपने रिकॉर्ड में वालेट होल्डर का केवाईसी दस्तावेज, फोन नम्बर, ई-मेल, बैंक खातों की डिटेल्स जिससे इन वालेट में पैसा भेजा जाता है, आदि जैसे रिकार्डस सुरक्षित रखते हैं। ट्रेस डिटेल्स पुलिस द्वारा सहयोग पोर्टल/ एलईआरएस/एमलेट (फारेन एक्सचेंज) पर अन्तर्गत धारा 94 बीएनएसएस की नोटिस भेजकर प्राप्त की जा सकती है।

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यदि क्रिप्टो वालेट नॉन कस्टोडियल या वेब 3.0 वालेट है तो इसे ट्रेस करना मुश्किल होता है, क्योंकि इस प्रकार के वालेट्स किसी प्रकार की केवाईसी डिटेल्स सुरक्षित नहीं रखते हैं। उपयोग कर्ता का सारा डेटा उपयोग कर्ता के डिवाइस में ही स्टोर रहता है।

इस प्रकार के वालेट्स को ट्रेस करने के लिए अलग-अलग तरीके के टूल्स जैसे-चेन एनालिसिस, एलिपटिक, साइफर ट्रैस, टीआरएम लैब्स, ट्रोन स्कैन इस्तेमाल किया जाता है। इनके मदद से धनराशि के ट्रान्सफर, उनसे लिन्कड एड्रेसेस, पैटर्न व ज्ञात स्कैम या रैनसमवेयर वालेट्स की पहचान की जा सकती है।

बस्ती मंडल में पकड़ में आए ऑनलाइन फ्रॉड के तरीके



मोबाइल के ऑनलाइन प्रयोग में बरतें सावधानी: डीआइजी
डीआइजी संजीव त्यागी का कहना है कि युवा पीढ़ी मोबाइल से खेल रहे हैं। आन लाइन बाजार उन्हें लुभा रहा है। इसलिए मोबाइल के ऑनलाइन प्रयोग में सावधानी बरतने की जरूरत है। कमीशन के लालच के चक्कर में युवा फंसते जा रहे हैं। इस खेल में क्रिप्टो करेंसी से साइबर फ्राड का काला धन बाजार में सफेद हो रहा है।

बताया कि यूएसडीपी स्टेबल क्वाइन एक क्रिप्टो करेंसी है और एथेरियम प्लेटफार्म पर काम करती है। ऐथरियम ऐसा प्लेटफार्म है, जो बिटकाइन यानी डिजिटल मुद्रा की तरह काम करता है। यह विकेंद्रीकृत प्रणाली है, इसका नियंत्रण किसी सरकार या संस्था के पास नहीं है। आन लाइन लेनदेन या शापिंग के लिए किया जाता है।
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