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Muzaffarpur : 35 वर्ष बाद लौरिया चीनी मिल से चीनी घोटाला के छह दोषियों को सजा

Chikheang 2025-12-19 01:37:21 views 1260
  

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । पश्चिम चंपारण की लौरिया चीनी मिल से 35 वर्ष पूर्व 997 बोरा चीनी के घोटाले में छह दोषियों को गुरुवार को सजा सुनाई गई।

प्रभारी विशेष लोक अभियोजक (निगरानी) कृष्ण देव साह ने बताया लखीसराय के करजानंद नगर निवासी चीनी मिल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक के विशेष सहायक, सम्प्रति उप प्रबंधक उमेश प्रसाद सिंह व भोजपुर के बरनाव निवासी चीनी मिल के प्रशासन प्रमुख नंद कुमार सिंह को दो-दो वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही सभी को 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

वहीं, पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज थाने के बहादुरपुर निवासी सुशील कुमार श्रीवास्तव, बेतिया के योगापट्टी सिरकिया का सुगरकेन लिपिक लालबाबु प्रसाद, मधुबनी के अंधराठारी का चीनी बिक्री प्रभारी धीरेंद्र झा, गोपालगंज के सिधवलिया थाने के हसनपुर मठिया का लेखा पदाधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव को तीन-तीन वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई।

इन सभी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। सत्र-विचारण के बाद विशेष कोर्ट निगरानी (उत्तर बिहार) के न्यायाधीश दशरथ मिश्र ने सभी दोषियों को सजा सुनाई। सभी दोषियों को जेल से विशेष कोर्ट लाया गया। इसके बाद विशेष कोर्ट के न्यायाधीश ने सभी दोषियों को हाईकोर्ट में अपील के लिए पीआर बांड पर छोड़ने का आदेश दिया।

प्रभारी विशेष लोक अभियोजक (निगरानी) कृष्ण देव साह ने छह गवाहों की गवाही कराने के साथ 61 प्रदर्शनों को पेश किए। आरोपित पक्ष से 12 लोगों ने सफाई साक्ष्य पेश किए थे।

28 फरवरी 2000 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीएसपी सदन कुमार श्रीवास्तव ने प्राथमिकी की थी। इसमें कहा था कि बिहार स्टेट सुगर कारपोरेशन लिमिटेड लौरिया, चीनी मिल का महाप्रबंधक एचबीएन सिंह व अन्य लोकसेवकों ने साजिश के तहत 21 से 28 सितंबर 1990 के बीच 997 बोरा चीनी का घोटाला किया गया।

जांच में पाया गया कि फर्जी क्रेता का नाम दर्शाकर उक्त चीनी का गबन किया गया। बाद में राशि का संबंधित चीनी का विपत्र बना समायोजन किया। पता चला कि इन आठ दिनों में उक्त चीनी मुजफ्फरपुर के गोला रोड स्थित मेसर्स गोपाल ट्रेड कंपनी 797 बोरा व मेसर्स लोकनाथ छोटी रमना बेतिया को 200 बोरा चीनी की बिक्री 8.88 लाख रुपये में बेचना दिखाया गया।

निगरानी की जांच में पता चला कि मुजफ्फरपुर के गोला रोड स्थित मेसर्स गोपाल ट्रेड कंपनी नाम का कोई फर्म नहीं है। इस फर्म को बस कागजों में ही दिखाया गया था ताकि इस फर्म के नाम पर चीनी का घोटाला किया जा सके। उस समय के तत्कालीन डीएसओ ने भी भौतिक सत्यापन कर उक्त फर्म के नहीं होने की पुष्टि की थी। साथ ही कहा था कि उक्त फर्म के नाम से कोई अनुज्ञप्ति नहीं है।
काम के दौरान केस, रिटायरमेंट के बाद सजा

जिन लोकसेवकों पर यह केस चला, उन्होंने नौकरी करते हुए मुकदमा झेला। रिटायरमेंट के बाद जीवन बिताया और अब उन्हें बुढ़ापे में दोषी पाया गया है। निगरानी ने 18 अधिकारियों व कर्मियों पर आरोप पत्र दायर किया था। इनमें से तीन की मौत हो चुकी है। शेष 15 आरोपितों में से नौ फरार के विरुद्ध वारंट जारी है।

विशेष लोक अभियोजक ने बताया केस के बाद निगरानी की टीम ने ट्रकों के नंबर की जांच की। इसमें सभी नंबर कार, स्कूटर व बाइक के मिले थे। ट्रकों से चीनी की दुलाई हुई थी।
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