केंद्रीय आर्थिक मामलों की समिति ने रेल मंत्रालय की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को दी मंजूरी
संवाद सूत्र, झाझा (जमुई)। केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने मंगलवार को रेल मंत्रालय की लगभग 9,072 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है। इनमें पुनारख–किऊल तीसरी एवं चौथी लाइन, गोंदिया–जबलपुर लाइन दोहरीकरण और गम्हरिया–चांडिल तीसरी एवं चौथी लाइन शामिल हैं।
हाजीपुर जोन के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बताया कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड के आठ जिलों में फैली इन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इस मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से करीब 5,407 गांवों की लगभग 98 लाख आबादी को बेहतर रेल संपर्क का लाभ मिलेगा।
पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन–झाझा रेलखंड का विस्तार
करीब 17,000 करोड़ रुपये की लागत से पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन (DDU) से झाझा तक लगभग 400 किलोमीटर लंबी तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण प्रस्तावित है। वर्तमान योजना के तहत DDU से किऊल तक तीसरी और चौथी लाइन तथा किऊल से झाझा तक तीसरी लाइन का निर्माण किया जाएगा। पूरी परियोजना को विभिन्न चरणों में विभाजित किया गया है। इसे DDU–दानापुर, दानापुर–फतुहा, फतुहा–बख्तियारपुर, बख्तियारपुर–पुनारख, पुनारख–किऊल और किऊल–झाझा रेलखंडों में बांटा गया है।
प्रथम चरण में फतुहा–बख्तियारपुर (24 किमी) और बख्तियारपुर–पुनारख (30 किमी) खंड को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। बख्तियारपुर–पुनारख खंड में निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। अब 50 किलोमीटर लंबे पुनारख–किऊल खंड में तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण को भी मंजूरी मिल गई है।
बढ़ते दबाव को देखते हुए लिया गया निर्णय
पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन–झाझा रेललाइन का निर्माण वर्ष 1860-70 के दशक में हुआ था, जिसे बाद में दोहरीकृत किया गया। जनसंख्या वृद्धि और औद्योगिकीकरण के कारण यात्री और मालगाड़ियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई, जिससे ट्रैक क्षमता पर दबाव बढ़ गया।
परिणामस्वरूप समय पालन और रखरखाव में कठिनाइयां आने लगीं। इन समस्याओं के समाधान हेतु पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर के साथ-साथ तीसरी और चौथी लाइन का निर्माण किया जा रहा है। नई लाइनों के निर्माण से मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का संचालन अधिक सुगमता से हो सकेगा और अतिरिक्त ट्रेनों के परिचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही क्षेत्र में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।
मल्टी-ट्रैकिंग से क्षेत्र में विकास
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी। बेहतर रेल संपर्क के कारण लोगों की आवाजाही सरल होगी और माल परिवहन की क्षमता भी बढ़ेगी। सरस्वती चंद्र ने कहा कि इस परियोजना से न केवल यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि रेल नेटवर्क का दक्षता स्तर भी सुधार होगा। मल्टी-ट्रैकिंग से ट्रेनों के समय पालन में सुधार, ट्रेन विलंब में कमी और संचालन लागत में बचत होने की उम्मीद है।  |