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Bhopal: राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, कहा– पहल ...

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भोपाल। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के विरोध में कांग्रेस ने मंगलवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के जवाहर चौक पर ‘किसान महाचौपाल’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि यह समझौता किसानों, छोटे व्यापारियों और देश की आर्थिक संप्रभुता के खिलाफ है। सभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने भी केंद्र सरकार की नीतियों को किसानों के लिए नुकसानदायक बताया।




  
“लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया”


राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि “हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया गया।” उन्होंने आरोप लगाया कि वे चीन की कथित घुसपैठ के मुद्दे पर अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन उन्हें अवसर नहीं दिया गया। राहुल ने कहा कि उन्होंने लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की पुस्तक का उल्लेख किया था, जिसमें कथित तौर पर लिखा गया है कि चीनी घुसपैठ के दौरान सेना को पर्याप्त राजनीतिक समर्थन नहीं मिला। उन्होंने सवाल उठाया, “प्रधानमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किसके आदेश पर 40 लोगों पर फायरिंग हुई? क्या ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री ही लेते हैं?” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री ने सेना प्रमुख से सीधे संवाद नहीं किया और स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। हालांकि, उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज मंच से प्रस्तुत नहीं किया।




  
ट्रेड डील पर तीखा हमला  


राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा कि “मोदी ने अमेरिका से देश बेचने की डील की है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते के कारण किसानों के हितों से समझौता हुआ है और देश का डेटा भी विदेशी कंपनियों के हाथों में जाने का खतरा है। उन्होंने कहा कि भारत की सरकार पहले बड़ी विदेशी कंपनियों को सोयाबीन, कपास और मक्का जैसे कृषि उत्पादों के जरिए भारतीय बाजार में प्रवेश नहीं देना चाहती थी, क्योंकि इससे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता था। राहुल ने दावा किया कि पिछले चार महीनों से इस मुद्दे पर चर्चा ठप थी और वे लोकसभा में केवल पूर्व सेना प्रमुख की बात नहीं, बल्कि इस व्यापार समझौते से जुड़े व्यापक मुद्दों को उठाना चाहते थे। कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस समझौते पर “दबाव” में निर्णय लिया गया है। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के संबंध में विस्तृत प्रमाण सार्वजनिक नहीं किए।




  
जीतू पटवारी का बयान


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुआ समझौता है। पटवारी ने कहा, “अगर यह समझौता देश के हित में होता, तो किसानों और आम जनता को नुकसान नहीं होता।” उन्होंने पूर्व में हुए किसान कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह किसानों के लंबे आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को कानून वापस लेने पड़े, उसी तरह इस मुद्दे पर भी सच्चाई सामने आएगी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार किसानों की आवाज उठा रहे हैं और भोपाल में महाचौपाल आयोजित करना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाएगी। पटवारी ने बताया कि 20 तारीख को राहुल गांधी ने स्वयं उनसे कार्यक्रम भोपाल में आयोजित करने की संभावना पर चर्चा की थी। उन्होंने दावा किया कि सभा में उमड़ी भीड़ कांग्रेस के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाती है।




  
उमंग सिंघार: “एमएसपी की अवधारणा कांग्रेस की देन”  


मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस ने वर्ष 1965-66 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की अवधारणा को आगे बढ़ाया था। उन्होंने दावा किया कि किसानों का कर्ज माफ करने जैसे कदम भी कांग्रेस सरकारों ने उठाए हैं। सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित ट्रेड डील का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश के किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने विशेष रूप से दुग्ध उत्पादकों का जिक्र करते हुए कहा, “अगर विदेशों से दूध का आयात बढ़ता है, तो प्रदेश के लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों का क्या होगा?” उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसी नीतियां बना रही है जिससे किसानों की प्रतिस्पर्धा बड़े विदेशी उत्पादकों से होगी।

  
राजनीतिक तापमान बढ़ा  


भोपाल की ‘किसान महाचौपाल’ ऐसे समय में आयोजित हुई है जब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों और कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। कांग्रेस इस मुद्दे को किसान हितों और आर्थिक स्वायत्तता से जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रही है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अब तक इस महाचौपाल में लगाए गए आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार पहले भी यह कह चुकी है कि किसी भी व्यापार समझौते में भारत के किसानों और उद्योगों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  
आंदोलन तेज करेगी कांग्रेस



कांग्रेस नेताओं ने संकेत दिए कि यदि सरकार ने ट्रेड डील की शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया और किसानों की चिंताओं का समाधान नहीं किया, तो पार्टी राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन तेज करेगी। भोपाल की इस सभा को कांग्रेस आगामी चुनावी रणनीति और किसान मुद्दों पर व्यापक जनसंपर्क अभियान की शुरुआत के रूप में देख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रेड डील और कृषि से जुड़े मुद्दे आने वाले महीनों में राजनीतिक विमर्श का प्रमुख विषय बन सकते हैं। अब नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है और क्या व्यापार समझौते के विवरण सार्वजनिक किए जाते हैं।
  







Editorial Team




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