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भोजपुर में पहली बार मखाना की खेती की शुरुआत, एक एकड़ में हुई रोपनी

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भोजपुर में पहली बार मखाना की खेती की शुरुआत, एक एकड़ में हुई रोपनी



जागरण संवाददाता, आरा। भोजपुर जिले में पहली बार मखाना की खेती की शुरुआत की गई। शहर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के परिसर में एक एकड़ जमीन पर मखाना के बीज की रोपनी की गई। इसमें भोला प्रसाद शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया के कृषि वैज्ञानिकों ने मदद की। यह पहल जिले के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने वाली मानी जा रही है।

अब तक जिले में मखाना की खेती नहीं होती थी, लेकिन इस प्रयोगात्मक पहल को माडल के रूप में विकसित कर आगे इसका विस्तार किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, मखाना के लगभग सात सौ बीज भोला प्रसाद शास्त्री कृषि महाविद्यालय, पूर्णिया से मंगाए गए थे। इन बीजों को वैज्ञानिक पद्धति से कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में रोपा गया। एक बीज से दूसरे बीज की दूरी लगभग चार वर्ग क्षेत्र में रखी गई है, ताकि पौधों को पर्याप्त स्थान मिल सके और बेहतर उत्पादन हो।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह फसल अगस्त-सितंबर तक तैयार हो जाएगी।कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. अजय कुमार मौर्या और डॉ. विकास सिंह ने संयुक्त रूप से बताया कि पहली बार कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में इस फसल का रोपण किया गया है।

उन्होंने कहा कि एक एकड़ क्षेत्र में की गई यह खेती पूरी तरह प्रदर्शन आधारित (डेमो) है, जिसे मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले समय में इसके रकबे का विस्तार किया जाएगा और अधिक किसानों को इससे जोड़ा जाएगा।
जिले के जल भराव वाले खेतों में होगी खेती

वैज्ञानिकों ने बताया कि भोजपुर जिले की कुछ जलभराव वाली जमीनें मखाना की खेती के लिए उपयुक्त हो सकती हैं। जिले में बाढ़ से ग्रसित बड़हरा, कोईलवर व शाहपुर में एक हजार से अधिक एकड़ जमीन जल भराव के कारण परती रहता है। इसी तरह से संदेश, सहार, तरारी प्रखंड में सोन नदी के पानी के कारण जलजमाव बना रहता है। इसमें खरीफ और रबी की फसल निकालना मुश्किल होता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए किसानों को प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत बीज डालने की विधि, पौधों की देखभाल, फसल तैयार होने पर उसे निकालने की प्रक्रिया तथा मखाना तैयार करने तक की पूरी जानकारी दी जाएगी।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मखाना एक लाभकारी नकदी फसल है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करें तो उनकी आय में वृद्धि संभव है।   
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