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2023 में ध्वस्त हुए मकान, फिर वोटर लिस्ट से कटा नाम... SC ने 91 लोगों की शिकायत पर दिया जांच का आदेश

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याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे अकबर नगर के पुराने निवासी हैं



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लखनऊ जिला निर्वाचन अधिकारी को अकबर नगर के उन 91 निवासियों की शिकायतों की जांच करने और जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जिनके नाम सितंबर 2023 में उनके मकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद मतदाता सूची से हटा दिए गए थे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने शुरू में यह विचार व्यक्त किया था कि याचिकाकर्ताओं के निवास स्थान से संबंधित मामले पर रिट याचिका के माध्यम से विचार नहीं किया जा सकता। बहरहाल, पीठ ने सना परवीन और 90 अन्य लोगों द्वारा दायर याचिका पर गौर किया और लखनऊ के जिला निर्वाचन अधिकारी को शिकायतों की जांच करने तथा जरूरी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट जाने की भी छूट

पीठ ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट भी दी कि यदि उन्हें जिला निर्वाचन अधिकारी से राहत नहीं मिलती है, तो वे इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ से संपर्क कर सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वे अपने नामांकन फार्म बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) को जमा करें, ताकि स्थायी पता नहीं होने के बावजूद उनके मतदान के अधिकार की रक्षा की जा सके।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे अकबर नगर के पुराने निवासी हैं, जिनके नाम 2002 से ही मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। बाद की सूचियों में युवा निवासियों के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, क्षेत्र में \“\“अवैध\“\“ निर्माण गिराए जाने के बाद उन्होंने खुद को उत्तर प्रदेश की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से बाहर पाया।
मकान गिराए जाने के बाद कटे नाम

उन्हें सूची से बाहर करने का मुख्य कारण यह है कि सरकार द्वारा मकान गिराए जाने और उसके बाद की पुनर्वास प्रक्रिया की वजह से वर्तमान में उनके पास \“\“पहचान योग्य पते\“\“ उपलब्ध नहीं हैं।

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर शमशाद ने पीठ को सूचित किया कि ये लोग 2025 की पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान एक विशेष सूची का हिस्सा थे। उनके विस्थापन के कारण उन्हें मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

बहरहाल, पीठ ने तथ्यात्मक सत्यापन का कार्य स्थानीय अधिकारियों को सौंपने की इच्छा व्यक्त की। पीठ ने लखनऊ जिला निर्वाचन अधिकारी को याचिकाकर्ताओं के मतदाता सूची में पहले शामिल होने और उनकी वर्तमान स्थिति के संबंध में तथ्यों का पता लगाने का निर्देश दिया।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: 2018 से पहले के भू-अधिग्रहण मामलों में ब्याज सहित मुआवजा नहीं


  
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