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मंडी शिवरात्रि महोत्सव में सजा देव दरबार, नगर की सुरक्षा के लिए देव आदिब्रह्मा ने जौ के आटे से बांधी कार

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जागरण संवाददाता, मंडी। अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोत्सव के आखिरी दिन चौहाटा में देव दरबार सजा। वहीं जलेब में आस्था का सैलाब उमड़ा। अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि महोत्सव के समापन पर बाबा भूतनाथ के प्रांगण में आयोजित पारंपरिक चौहटा की जातर के बाद जनपद के देवी-देवता अपने-अपने धाम की ओर विदा हो गए।

सात दिनों तक ढोल नगाड़ों की थाप, शहनाइयों की गूंज और जय हो देव के उद्घोष से सराबोर रहने वाली छोटी काशी रविवार को शांत हो गई।

  
नगर की सुरक्षा के लिए कार रक्षा सूत्र

मंडी शहर की खुशहाली और बुरी आत्माओं से रक्षा के लिए देव आदिब्रह्मा ने कार बांधी। देवता के गूर ने रथ के साथ शहर की परिक्रमा की और सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। इस दौरान देवलुओं ने जौ के आटे को हवा में उड़ाकर एक दिव्य वातावरण निर्मित कर दिया।
सुबह ही उमड़ पड़ी भीड़

रविवार को छह बजे से चौहाटा बाजार में देवी देवताओं का भव्य दरबार सजना आरंभ हो गया। आठ बजे तक सभी देवी देवता उपायुक्त कार्यालय से लेकर बाबा भूतनाथ मंदिर तक विराजमान हो गए। देवताओं का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों की भीड़ भी उमड़ी। चौहाटा देवलोक जैसा प्रतीत हो रहा था। लोगों ने अपने आराध्य देव के पास पहुंचकर जहां आशीर्वाद लिया, वहीं उनको भेंट भी प्रदान किए।

  

नवविवाहित जोड़े जहां सुखी जीवन का आशीर्वाद ले रहे थे, तो छोटे बच्चों को कंधों पर उठाए उनके स्वजन सुखशांति और बच्चों की सफलता की कामना कर रहे थे। बुजुर्ग भी भीड़ अपने आशीर्वाद लेने से पीछे नहीं थे।  
देवता अपने मूल स्थान के लिए जाने लगे

दोपहर दो बजे के करीब देवताओं ने अपने स्थान छोड़े। इस दौरान देव मिलन भी हुआ। उपायुक्त एवं मेला कमेटी अध्यक्ष अपूर्व देवगन ने राज राजेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद सभी देवताओं को चादरें और भेंट प्रदान कर उन्हें ससम्मान विदा किया।

  
दूसरे वर्ष सेरी चानणी में बैठे बड़ा देव कमरुनाग

पिछले सात दिनों माता टारना के मंदिर में विराजमान बड़ादेव कमरूनाग सुबह सात बजे मंदिर से प्रस्थान कर गए। भक्तों को आशीर्वाद देते हुए देवता नौ बजे सेरी चानणी पहुंचे। यहां पर पुलिस के कड़े पहरे के बीच सुबह ही भक्तों की भीड़ देवता के लिए लग गई। पुलिस को लोगों को नियंत्रित करने में मशक्कत करनी पड़ी।  बड़ा देव करीब डेढ़ घंटे तक सेरी चानणी की सीढ़ियों पर विराजमान होकर करीब साढ़े दस बजे वहां से प्रस्थान कर गए। देवता गत वर्ष सेरी चानणी पर नहीं बैठे थे, लेकिन इस बार देवता के यहां बैठने से भक्तों में उत्साह था।

यह भी पढ़ें: मंडी शिवरात्रि महोत्सव के मंच पर फिर बवाल, हंसराज रघुवंशी बुलाए तो इंद्रजीत ने किया किनारा; क्या है पूरा विवाद?
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