विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल में शामिल हुए युवा माकपा नेता प्रतीक-उर- रहमान (फोटो- एक्स)
राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले युवा माकपा नेता प्रतीक-उर- रहमान शनिवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव व डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी का हाथ पकड़कर उन्होंने तृणमूल का झंडा थामा।
पिछले साल लोकसभा चुनाव में रहमान ने डायमंड हार्बर सीट से अभिषेक बनर्जी के खिलाफ माकपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। संयोग से जिसके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा, उन्हीं का हाथ पकड़कर शनिवार शाम में दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर लोकसभा अंतर्गत आमतला में अभिषेक के कार्यालय के सामने सड़क पर खड़े होकर औपचारिक रूप से वह तृणमूल में शामिल हुए। रहमान पिछले कुछ समय से विभिन्न मुद्दों पर पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे।
इस मौके पर अभिषेक ने स्पष्ट किया कि रहमान ने चुनाव लडऩे के लिए टिकट की मांग नहीं की है, बल्कि संगठनात्मक काम करने की इच्छा जताई है। वहीं, तृणमूल में शामिल होने के कुछ ही समय बाद माकपा ने रहमान को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इससे पहले सड़क पर खड़े होकर संभवत: किसी नेता के तृणमूल में शामिल होने की मिसाल नहीं थी।
इस पर अभिषेक बनर्जी ने तंज कसते हुए कहा कि रहमान ने माकपा को भी सड़क पर उतरने का रास्ता दिखाया है। रहमान तृणमूल में शामिल होने के लिए शाम में जिस वक्ता आमतला स्थित कार्यालय में पहुंचे, उस दौरान अभिषेक पार्टी नेताओं के साथ आंतरिक बैठक कर रहे थे। शाम करीब चार बजे रहमान वहां अचानक पहुंचे और पार्टी की सदस्यता ली। इसके तुरंत बाद माकपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया।
अभिषेक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि माकपा रहमान पर तृणमूल से डील करने का आरोप लगा रही है, जबकि उन्होंने स्वयं कहा है कि यदि टिकट भी दिया जाए, तो वह नहीं लेंगे। बनर्जी ने कहा कि माकपा अपने ही कार्यकर्ता को नहीं पहचान सकी और उसे पहले ही गद्दार घोषित कर दिया।
उन्होंने माकपा नेतृत्व, विशेषकर पार्टी के प्रदेश सचिव मोहम्मद सलीम पर निशाना साधते हुए कहा कि असहमति बर्दाश्त न करने की प्रवृत्ति पार्टी में बढ़ी है। अभिषेक ने एसआइआर मुद्दे, केरल में माकपा की भूमिका, कांग्रेस के साथ विभिन्न राज्यों में अलग-अलग रुख और राज्य की महत्वाकांक्षी लक्ष्मी भंडार योजना पर की गई टिप्पणियों को लेकर भी सवाल उठाए।
मालूम हो कि रहमान ने हाल में माकपा की राज्य कमेटी, जिला कमेटी और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफे का पत्र पार्टी को भेजा था। इसके बाद पार्टी के भीतर उन्हें बनाए रखने की कोशिशें भी हुईं और वाममोर्चा के चेयरमैन बिमान बसु ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन अंतत: बात नहीं बनी। रहमान ने आखिरकार तृणमूल का दामन थाम लिया। |
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