आनलाइन टिकट
जागरण संवाददाता, बरेली। रेलवे अधिक से अधिक डिजिटल भुगतान पर जोर दे रहा है। इसके लिए अधिक से अधिक टिकटों की बुकिंग आनलाइन की जा रही है। बरेली जंक्शन के टिकट काउंटर पर भी क्यूआर कोड स्कैनर लगा दिए गए हैं। इसके अलावा टिकट काउंटर की संख्या कम कर एटीवीएम (आटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन) की संख्या बढ़ाई जाएगी। वहीं रेल वन एप को एटीवीएम से कनेक्ट कर दिया गया है ताकि यात्री क्यूआर कोड स्कैन कर आनलाइन भुगतान कर सकें।
रोजाना होती है 12 हजार टिकटों की बिक्री
जानकारी के मुताबिक बरेली जंक्शन पर टिकट काउंटर से रोजाना औसत 12 हजार टिकटों की बिक्री होती है और इससे रेलवे को 16 लाख रुपये की आय होती है। इसके अलावा एटीवीएम से रोजाना पांच हजार टिकटों की बिक्री और पांच लाख की आय होती है। अब अधिकारियों ने एटीवीएम से 10 हजार टिकट रोजाना बिक्री का लक्ष्य रखा है।
वहीं आनलाइन बुकिंग से रोजाना दो लाख रुपये की आय होती है। जंक्शन पर पहले छह अनारक्षित टिकट काउंटर चलते थे और इन काउंटर पर लंबी लाइनें लगती थीं। कई बार यात्रियों की ट्रेन भी टिकट लेने के चक्कर में देरी होने पर छूट जाती थी। ऐसे में एटीवीएम लगाई गईं। अब धीरे-धीरे टिकट काउंटर कम किए जा रहे हैं और एटीवीएम बढ़ाई जा रही हैं।
बढ़ेंगी एटीवीएम, अभी लगी हैं आठ
बरेली जंक्शन के टिकट घर में वर्तमान में तीन टिकट काउंटर चल रहे हैं, जिन्हें भविष्य में सिर्फ एक करने की तैयारी है। टिकट काउंटर पर कई बार यात्री शिकायत करते हैं कि उनसे रुपये अधिक ले लिए गए। कई बार छुट्टा न होने पर भी दिक्कत आती है। इसके अलावा जंक्शन पर अभी आठ एटीवीएम हैं, जिन्हें और बढ़ाया जाएगा। एटीवीएम पर वेंडर यात्रियों को रुपये देने पर टिकट देते हैं।
कई लोग आनलाइन भुगतान करते हैं ऐसे में एटीवीएम की स्क्रीन पर रेल वन एप का क्यूआर कोड आने लगा है। ऐसे में लोग इसे स्कैन कर आनलाइन भुगतान कर सकते हैं। तीन जेटीबीएस (जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवा) से भी टिकटों की बिक्री की जा रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अधिक से अधिक आनलाइन भुगतान से यात्रियाें की ओवरचार्जिंग की शिकायत भी काफी हद तक दूर हो जाएगी।
50 फीसद कैशलेस टिकटों का हो रहा वितरण
मुख्य वाणिज्य निरीक्षक मो. सैय्यद इमरान चिश्ती ने बताया कि अभी जंक्शन पर 50 फीसदी कैशलेस टिकटों का वितरण हो रहा है। यात्री भी अधिक से अधिक संख्या में रेल वन एप से टिकट बना रहे हैं। अब यात्री एमएसटी भी रेल वन एप से बनवा सकते हैं। डिजिटल लेनदेन पर ज्यादा जोर है, इसके लिए टिकट काउंटर की संख्या कम कर एटीवीएम की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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