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अर्जुन शर्मा हत्याकांड: अपनों के चक्रव्यूह में फंसा था अर्जुन, जांच के घेरे में एक और चेहरा

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अर्जुन शर्मा हत्याकांड।



अवनीश चौधरी, देहरादून। गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा हत्याकांड में मां बीना शर्मा की गिरफ्तारी ने पहले ही रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए थे।

अब पुलिस की जांच की आंच परिवार के एक और बेहद करीबी सदस्य तक पहुंच गई है। पुलिस सूत्रों की मानें तो जांच के रडार पर वह महिला है, जो अर्जुन के काफी करीब थी।

वह संपत्ति विवाद से लेकर हर मामले में अर्जुन की साझेदार रही, लेकिन हत्या से कुछ दिन पहले उसका अर्जुन से विवाद हुआ था। ऐसे में अब जांच की सुईं उक्त महिला की तरफ भी घूम गई है।

पुलिस के सूत्रों के मुताबिक मामले की जांच आगे बढ़ने पर उस महिला ने कुछ सवालों से किनारा किया, जिसकी वजह से वह जांच के दायरे में है।  

जांच टीम अब उस कड़ी को जोड़ने में लगी है, जिससे महिला को अर्जुन की हत्या का लाभ मिलने वाला था।

अब शक को पुख्ता करने के लिए उन काल रिकार्ड्स और मुलाकातों को खंगाला जा रहा है, जो हत्याकांड से ठीक पहले उस महिला ने की थीं।

पुलिस जांच की दिशा बदलने की वजह हत्याकांड से कुछ दिन पहले वसंत विहार थाने में दर्ज हुई वह एफआइआर है, जो अर्जुन और अन्य के खिलाफ दर्ज करवाई गई थी।

इसमें अर्जुन व अन्य सदस्यों पर धोखाधड़ी का आरोप था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस एफआइआर के दर्ज होने के बाद अर्जुन के अपनों से समीकरण तेजी से बदले थे।

बता दें कि तिब्बती मार्केट के पास अर्जुन शर्मा की भाड़े के हत्यारों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले में पुलिस ने अर्जुन की मां बीना शर्मा को मुख्य आरोपी बनाया है।

पारिवारिक रंजिश और करोड़ों के संपत्ति विवाद को इस हत्याकांड की मुख्य वजह माना गया है।
बंद होने की दहलीज पर अमरदीप गैस एजेंसी

सुद्धोवाला जेल में बंद अर्जुन की मां बीना शर्मा के हस्ताक्षर के अभाव में अमरदीप गैस एजेंसी पर बंदी के संकट का मामला सीजेएम कोर्ट पहुंच गया है।

मामले में आज (शनिवार) सुनवाई हो सकती है। 11 फरवरी को अर्जुन की हत्या के बाद से गैस एजेंसी के सभी लेन-देन ठप हैं।

भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) ने बकाया न चुकाने की सूरत में कार्रवाई की चेतावनी दी है। एजेंसी से लगभग 28 हजार उपभोक्ता जुड़े हैं।

जेल प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर न्यायिक हिरासत में मौजूद बीना को चेक पर साइन करने की इजाजत देने से इन्कार कर दिया था।

ऐसे में बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित पुंडीर ने गुरुवार को अदालत का रूख किया। अर्जी दाखिल करके दलील दी कि एजेंसी के संचालन के लिए लगभग आधा दर्जन चेक साइन होने बाकी हैं।

भारत पेट्रोलियम ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ, तो एजेंसी की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।

इस पर अदालत ने गुरुवार को कानून के अनुसार आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए, लेकिन जेल प्रशासन ने फिर से नियमों का हवाला देकर साइन कराने से इन्कार कर दिया।

याचिकाकर्ता को कहा कि जेल प्रशासन नियमों के संबंध में अदालत के समक्ष जवाब प्रस्तुत करेगा।

ऐसे में अधिवक्ता पुंडीर ने शुक्रवार को फिर अदालत में एक अर्जी दाखिल की, जिसमें जेल मैनुअल का हवाला देते हुए दलील दी है कि बंदी को विशेष परिस्थितियों में आवश्यक व्यापारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दी जा सकती है, ताकि सार्वजनिक सेवा (गैस आपूर्ति) बाधित न हो। इस पर सुनवाई का इंतजार है।
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