अशोक शर्मा, जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय (जेयू) की अकादमिक काउंसिल व विश्वविद्यालय प्रशासन ने कांट्रैक्चुअल शिक्षकों की नियुक्ति व्यवस्था को समाप्त कर उन्हें गेस्ट फैकल्टी के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश को मंजूरी दी है। इस फैसले से वर्षों से सेवाएं दे रहे 150 से अधिक शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है।
इन शिक्षकों का कहना है कि उच्च शिक्षित, पीएचडी धारक युवाओं को अस्थिर बनाना शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
भेदभावपूर्ण है यह नीति
विरोध कर रहे शिक्षकों ने प्रश्न उठाया है कि यदि देश विकसित भारत और विश्वगुरु बनने का सपना देख रहा है, तो क्या उसमें गुरु की गरिमा और सुरक्षा शामिल नहीं है। उनका कहना है कि यह नीति भेदभावपूर्ण है और उन्हें स्थिर रोजगार से वंचित कर अस्थायी व असुरक्षित व्यवस्था में धकेलने का प्रयास है।
उनका आरोप है कि गेस्ट फैकल्टी व्यवस्था वस्तुतः शोषणकारी माडल है। जिससे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, वेतन संरचना और गरिमा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए, जिससे सौ से अधिक शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
क्यों है कश्मीर विश्विद्यालय में अलग व्यवस्था?
विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि समान कानून के तहत संचालित कश्मीर विश्वविद्यालय में अब भी कांट्रैक्चुअल आधार पर नियुक्तियों की प्रक्रिया जारी है। जब एक ही प्रदेश में एक ही अधिनियम के तहत दो विश्वविद्यालय कार्यरत हैं तो नियुक्ति नीति में दोहरी व्यवस्था भेदभाव को जन्म देती है।
कांट्रैच्युअल शिक्षकों का कहना है कि कश्मीर विश्वविद्यालय का वीसी स्थानीय है, इसलिए उन्होंने अपने युवाओं के हितों की रक्षा की है जबकि जम्मू के वीसी को स्थानीय युवाओं से कोई लेना देना नहीं है।
समिति की संवैधानिक वैधता पर उठाए सवाल
शिक्षकों ने उस समिति की वैधता पर भी सवाल उठाए है, जिसने यह सिफारिश की। आरोप है कि समिति में ऐसे प्रोफेसर शामिल थे जो सेवा-विस्तार, एक्सटेंशन पर है, जबकि नियमों के अनुसार एक्सटेशन अवधि में वे केवल शिक्षण और शोध कार्य कर सकते हैं। प्रशासनिक निर्णय नहीं ले सकते।
संभाग के दूरदराज, सीमावर्ती कैंपस भी होंगे प्रभावित
यह निर्णय केवल मुख्य परिसर तक सीमित नहीं है। कटुआ, भद्रवाह, रामनगर, रियासी और पुछ जैसे दूरदराज और सीमावतीं क्षेत्रों के सैटेलाइट कैंपसों में कार्यरत युवा शिक्षक भी इससे सीधे प्रभावित होंगे।
इन क्षेत्रों में पहले ही उच्च शिक्षा की पहुंच सीमित है। ऐसे में शिक्षकों की अस्थिरता का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा। प्रभावित शिक्षक जम्मू क्षेत्र के विभिन्न जिलों से संबंध रखते हैं। उनका कहना है कि वे मिट्टी के बेटे-बेटियां है। जिन्होंने अन्य अवसरों के बजाय शिक्षा क्षेत्र में सेवा को चुना। अब वही युवा अपने ही क्षेत्र में असुरक्षा और अपमान का सामना कर रहे हैं।
गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति के लिए नई गाइडलाइंस
जम्मू विश्वविद्यालय की अकादमिक काउंसिल बैठक में गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति संबंधी दिशा-निर्देशों पर चर्चा की गई थी। प्रस्तावित दिशानिर्देशों के अनुसार गेस्ट फैकल्टी का कार्यभार प्रति सप्ताह अधिकतम 16 घंटे से अधिक नहीं होगा।
चयन और स्क्रीनिंग प्रक्रिया विश्वविद्यालय द्वारा पूर्व में जारी अधिसूचना 26 मई 2017 तथा यूजीसी विनियम 2010 और 2018 के तहत निर्धारित मानको के अनुसार की जाएगी। गेस्ट फैकल्टी का पैनल पूरी तरह अस्थायी और प्राविजनल होगा, जो एक शैक्षणिक सत्र के लिए मान्य रहेगा। नियुक्ति संतोषजनक प्रदर्शन और आचरण के आधार पर होगी।
नई व्यवस्था में कांट्रैक्ट और गेस्ट फैकल्टी में अंतर
कांट्रेक्ट पर नियुक्ति आमतौर पर एक पूरे शैक्षिक सत्र के लिए की जाती जबकि गेस्ट फैकल्टी को लेक्चर के है हिसाब से बुलाया जाता है। इसमें प्रबंधन को जितने लेक्चर के लिए उम्मीदवार की आवश्यकता हो, उतने लेक्चर के लिए बुलाया किया जाता है। कांट्रेक्ट शिक्षकों को एक तय मानदेय दिया जाता है जबकि गेस्ट फैकल्टी को उनके द्वारा लिए गए लेक्चर के आधार पर भुगतान होगा। |
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