7 फरवरी की शाम सूरजकुंड मेले में झूला टूटने से हुआ था हादसा। बचाव कार्य के दौरान इंस्पेक्टर जमदीश प्रसाद की गई थी जान।
दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। बड़े सावर्जनिक आयोजनों में सुरक्षा इंतजाम नहीं होते। सूरजकुंड मेले में झूला टूटने से हुए हादसे के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए हरियाणा सरकार और संबंधित अधिकारियों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि मेले जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। 7 अप्रैल सुनवाइ होगी।
आयोग के आदेश के अनुसार 7 फरवरी की शाम करीब साढ़े छह बजे “त्सुनामी राइड” नामक बिजली चालित झूला संचालन के दौरान भरभराकर गिर पड़ा। झूले में लगभग 26 लोग सवार थे। हादसे में 13 लोग घायल हुए। बचाव कार्य के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद मलबे के नीचे दब गए और उनकी मौत हो गई।
आयोग ने इसे कर्तव्य पालन के दौरान हुआ बलिदान बताते हुए इंस्पेक्टर के आश्रितों को दिए गए या प्रस्तावित मुआवजे का ब्योरा भी मांगा है। साथ ही जिम्मेदारी तय करने को कहा है। आयोग ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि उसी दिन मेले में अस्थायी प्रवेश द्वार के तेज हवा से गिरने की घटना भी सामने आई थी, जिसमें दो-तीन लोग घायल हुए।
गेट नंबर-2 के पास एक अन्य अस्थायी ढांचा खतरनाक ढंग से झुका हुआ पाया गया, जिसे तत्काल हटाया गया। आयोग ने इन घटनाओं को व्यवस्थागत लापरवाही का संकेत माना है। आदेश में कहा गया है कि मेले में स्थापित अधिकांश ढांचे अस्थायी थे, जिनकी संरचनात्मक व विद्युत सुरक्षा का पूर्व परीक्षण और प्रमाणन होने का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षा इंतजामों में लापरवाही को बताया गंभीर चिंता का विषय
बड़े जनसमूह वाले आयोजन में प्रशिक्षित आपातकालीन बचाव दल, पर्याप्त एंबुलेंस, फायर टेंडर और चिकित्सा इकाइयों की स्पष्ट तैनाती न होना भी गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। आयोग ने माना कि ये घटनाएं संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार से जुड़ी गंभीर चिंताएं उठाती हैं। आदेश में कहा गया है कि “मेला हर दृष्टि से निष्पक्ष और सुरक्षित होना चाहिए।”
सांस्कृतिक उत्सव के साथ-साथ सुरक्षा, जवाबदेही और सुगम्यता को समान प्राथमिकता देना अनिवार्य है। आयोग ने उपायुक्त फरीदाबाद, पुलिस महानिदेशक हरियाणा, पर्यटन एवं विरासत विभाग के आयुक्त-सचिव, सूरजकुंड मेला प्राधिकरण और मुख्य विद्युत निरीक्षक से अलग-अलग रिपोर्ट तलब की है।
साथ ही राज्य सरकार को व्यापक एसओपी बनाने या संशोधित करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें तृतीय-पक्ष सुरक्षा ऑडिट, नियमित निरीक्षण, मौसम आधारित जोखिम आकलन और भीड़ प्रबंधन की स्पष्ट व्यवस्था शामिल हो। आयोग ने संकेत दिया है कि जिम्मेदार अधिकारियों और आयोजकों की जवाबदेही तय कर दंडात्मक व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो। |