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वाराणसी भूगर्भ जल संकट, बारिश के बावजूद पिंडरा, बड़ागांव में गहराया जलस्तर

Chikheang 1 hour(s) ago views 707
  



जागरण संवाददाता, वाराणसी। गर्मी दस्तक दे चुकी है, ऐसे में पानी की चिंता लाजमी है। पेयजल की आपूर्ति की स्थिति पहले ही जर्जर पाइपों के बीच दम तोड़ रही है। जनजन तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की बात लंबे अरसे से पन्नों के बीच गुम है। अब सारा दाराेमदार भूगर्भ जल पर टिका है लेकिन गंगा, वरुणा व गोमती नदी तट पर होने के बावजूद वाराणसी भूगर्भ जल स्तर में व्यापक सुधार नहीं दिख रहा है।

जल संचयन के तमाम उपाय भूगर्भ जल दोहन पर भारी पड़ रहा है। हालांकि अबकी अच्छी बारिश व बारिश के एक बूंद को सहजने की दिशा में हुए अच्छे कार्य के परिणाम से औसतन जिले में 70 सेंटी मीटर भूगर्भ जल के पानी की बढ़ोत्तरी हुई लेकिन बड़ागांव ब्लाक के आंकड़े़ चिंता में भी डाल रही है।  

सेफ जोन बड़ागांव ब्लाक में तीन मीटर से अधिक घटा पानी..
भूगर्भ जल विभाग की इस साल मानसून बाद नवंबर-दिसंबर में हुए सर्वे की रिपोर्ट आ चुकी है। मानसून बाद के औसत आंकड़े वर्ष 2024 व 2025 की तुलना में कुछ क्षेत्रों में भयावह स्थिति को दर्शा रहे हैं। बड़ागांव में पिछले साल की तुलना में सर्वाधिक 3.33 मीटर, पिंडरा में 1.97 व सेवापुरी में 0.33 मीटर भूगर्भ जलस्तर घटा है।  

पानी का लेबल बढ़ा पर डार्क जोन से नहीं मिली मुक्ति
भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ें नगरीय क्षेत्र समेत कुछ ब्लाकों के लिए सुखद है। मानसून के बाद पिछले साल की तुलना में डार्क जोन में शामिल आराजीलाइन में 4.43 मीटर पानी बढ़ा है लेकिन इसे अभी डार्क जोन से मुक्ति नहीं मिली है। इसी प्रकार वाराणसी सिटी में .81 मीटर पानी की बढ़ोत्तरी दर्ज है पर डार्क जोन में यह बरकरार है।  

हरहुआ ब्लाक डार्क जोन से आया क्रिटिकल में
डार्क जोन में शामिल हरहुआ ब्लाक में 0.14 मीटर पानी बढ़ने का फायदा मिला और अब यह ब्लाक क्रिटिकल जोन में जा चुका है। सेमीक्रिटिकल में शामिल काशी विद्यापीठ 2.93 मीटर पानी बढ़ा है पर अभी इसी जोन में है।  

अत्यधिक भूगर्भ जल दोहन से स्थिति हुई खराब
भूगर्भ जल विज्ञानी कुछ क्षेत्रों में तेजी से भूगर्भ जल नीचे जाने के कई कारण गिना रहे हैं। पिंडरा में इंडस्ट्रीयल एरिया बनने के कारण अत्यधिक जल दोहन, खेती-बाड़ी में अधिक पानी का दुरुपयोग संग अत्यधिक नव निर्मित हो रहे आवासीय भवनों में सबमर्सिबल से भूगर्भ जल की निकासी आदि मान रहे हैं।

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भूगर्भ जल निकासी की स्थिति

  • 0-100 प्रतिशत से ऊपर (डार्क जोन- अति दोहित)
  • 0-90 से 100 प्रतिशत (क्रिटिकल-गंभीर)
  • 0-70 से 90 प्रतिशत (सेमी क्रिटिकल)
  • 0-70 प्रतिशत तक सेफ जोन (सुरक्षित )


महत्वपूर्ण

  • जिले में 406 अमृत सरोवर बने
  • 139 तालाबों का हुआ जीर्णोद्धार
  • 6260 से अधिक सोख्ता गड्ढ़े
  • दस चेक डैम का भी हुआ निर्माण
  • रैन वाटर हार्वेस्टिंग से तीन लाख वर्ग वर्गमीटर छत आच्छादित


वाराणसी में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर बेहतर कार्य हुए हैं। इसके अलावा तालाबों की साफ सफाई, लो लैंड पर पानी संचयन को लेकर भी कार्य चल रहे हैं। इसका फायदा दिख भी रहा है लेकिन कुछ क्षेत्रों में मुख्य तौर पर पिंडरा, बड़ागांव व सेवापुरी में भूगर्भ जल के अत्यधिक दोहन से भूगर्भ जल का नीचे जाना चिंता की बात है। इस दिशा में इस बार व्यापक कार्य होंगे। इसी परिप्रेक्ष्य में शिक्षण संस्थाओं को नोटिस जारी कर रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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-डा. नम्रता जायसवाल, सीनियर हाइड्रोजियोलाजिस्ट।


भूगर्भ जल संचयन को लेकर अनवरत अभियान चल रहे हैं। उंदी, गजोखर, डाेमैला समेत कई बड़े तालाब पर काम शुरू हो गया है। शासन से धनराशि भी जारी की जा चुकी है। खेती बाड़ी में सिंचाई के लिए किसानों को नई तकनीकी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बड़ागांव व पिंडरा में जल स्तर पर आ रही कमी को लेकर शीघ्र बैठक कर प्लान तैयार किया जाएगा।
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-सत्येंद्र कुमार, जिलाधिकारी
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