संभल जामा मस्जिद
संवाद सहयोगी, संभल। विवादित स्थल व एएसआइ संरक्षित जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई और सजावट के लिए मस्जिद के सदर जफर अली ने अनुमति मांगी है। रमजान माह के मद्देनजर मस्जिद कमेटी ने एएसआइ मेरठ सर्किल के सुपरिटेंडेंट आर्कियोलाजिस्ट को पत्र भेजकर जल्द इजाजत दिए जाने की मांग की है।
बुधवार को जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने एएसआइ मेरठ के सुपरिटेंडेंट आर्कियोलाजिस्ट को भेजे गए पत्र में कहा है कि पिछले वर्ष रमजान के दौरान एएसआइ की देखरेख में मस्जिद की रंगाई-पुताई कराई गई थी, लेकिन बरसात और धूल-मिट्टी के कारण अब दीवारों का रंग फीका पड़ गया है। मस्जिद की भव्यता और आकर्षण प्रभावित हो रहा है।
ऐसे में रमजान से पूर्व रंग-रोगन कराया जाना जरूरी है, क्योंकि इस दौरान बड़ी संख्या में नमाजी इबादत के लिए पहुंचते हैं। मालूम हो कि जामा मस्जिद एएसआइ संरक्षित है। हिंदू पक्ष की ओर से यहां हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए न्यायालय में वाद दायर किया गया है। 24 नवंबर 2024 को एडवोकेट कमिश्नर की टीम सर्वे के लिए पहुंची थी, वहां विरोध के दौरान हिंसा भड़क गई थी।
घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और 25 से अधिक पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए थे। सात प्राथमिकी में 37 लोगों को नामजद करते हुए 3750 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज हुआ था। जामा मस्जिद के सदर जफर अली भी जेल गए थे। घटना के बाद प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाई गई थी। मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, जिससे किसी भी कार्य से पहले अनुमति अनिवार्य हो गई है।
पिछले वर्ष भी रमजान से पहले मांगी थी अनुमति
23 फरवरी 2025 को भी सदर जफर अली ने एएसआइ को पत्र देकर रंगाई-पुताई की अनुमति मांगी थी। विभाग द्वारा अनुमति न दिए जाने पर मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 12 मार्च 2025 को उच्च न्यायालय ने एएसआइ की निगरानी में रंगाई-पुताई व सजावट की अनुमति दी थी। इसके बाद 16 मार्च 2025 से कार्य प्रारंभ हुआ था। हालांकि हिंसा से पहले कभी भी कमेटी ने एएसआइ से रंगाई-पुताई की अनुमति नहीं मांगी थी।
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