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राज्यसभा रण में ओडिशा की ‘चौथी सीट’ पर महासंग्राम: भाजपा दो पर मजबूत, बीजद-कांग्रेस की चाल से तय होगी बाजी

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संतोष कुमार पांडेय, अनुगुल। भारतीय जनता पार्टी ओडिशा में आगामी राज्यसभा चुनाव में दो सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि बीजू जनता दल को एक सीट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। चौथी सीट के लिए राजनीतिक दांव-पेच तेज हो गए हैं, क्योंकि किसी भी दल के पास अकेले दम पर जीत के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है।

भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार को घोषणा की कि ओडिशा सहित 10 राज्यों में द्विवार्षिक राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को कराए जाएंगे। ओडिशा से उच्च सदन की चार सीटें 2 अप्रैल को रिक्त हो जाएंगी। इन सीटों पर निरंजन बिशी और मुन्ना खान (बीजद) तथा सुजीत कुमार और ममता मोहंता (भाजपा) का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
क्या है विधानसभा का गणित?

147 सदस्यीय ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और उसे तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। विपक्षी बीजद की संख्या दो विधायकों के निलंबन के बाद घटकर 48 रह गई है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के 14 विधायक हैं, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का एक सदस्य है।

राज्यसभा चुनाव के नियमों के अनुसार, किसी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 30 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होती है। मौजूदा गणित के आधार पर भाजपा दो सीटें और बीजद एक सीट सुरक्षित कर सकती है। असली मुकाबला चौथी सीट के लिए होगा।

भाजपा अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद लगभग 22 अतिरिक्त मतों के साथ रहेगी, जो तीसरी सीट के लिए आवश्यक संख्या से आठ कम हैं। दूसरी ओर, बीजद के पास एक उम्मीदवार के निर्वाचित होने के बाद 18 अतिरिक्त मत बचेंगे। कांग्रेस के 14 और माकपा के एक विधायक के समर्थन से भी संख्या 15 ही होती है, जो जीत के लिए पर्याप्त नहीं है।
कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस विधायक दल के नेता राम चंद्र कदम ने कहा कि संख्यात्मक रूप से कमजोर होने के बावजूद पार्टी उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि या तो बीजद चौथी सीट पर कांग्रेस के समर्थन से उम्मीदवार उतारे या भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करे।

ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक से इस मुद्दे पर मुलाकात कर सकते हैं। कांग्रेस ने संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार उतारने की भी पेशकश की है। हालांकि, नवीन पटनायक या बीजद की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
भाजपा का दावा

भाजपा ने चौथी सीट भी जीतने का भरोसा जताया है। भाजपा विधायक टंकाधर त्रिपाठी ने विधानसभा परिसर में कहा, “इंतजार कीजिए, भाजपा अधिकतम सीटें जीतेगी और सबको चौंका देगी।”

अब निगाहें 16 मार्च को होने वाले मतदान और संभावित राजनीतिक जोड़-तोड़ पर टिकी हैं। चौथी सीट का परिणाम ही यह तय करेगा कि क्या विपक्ष एकजुट होकर भाजपा की रणनीति को चुनौती दे पाता है या सत्ताधारी दल बाजी मार लेता है।
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