गहरे गड्ढे में गिरकर युवक की मौत हुई थी।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। जनकपुरी इलाके में एक गहरे गड्ढे में गिरकर हुई युवक की मौत के मामले में द्वारका डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने मुख्य आरोपित हिमांशु गुप्ता और कविश गुप्ता की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. इसके साथ ही, न्यायालय ने आरोपितों को मिले अंतरिम संरक्षण को भी हटा दिया है।
सेशन जज हरलीन सिंह ने सुनवाई के बाद अपराध की गंभीरता और जांच के शुरुआती चरण को देखते हुए आरोपित को राहत देने से इनकार कर दिया है। यह मामला जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड की मुख्य सीवर लाइनों के मरम्मत कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी से जुड़ा है। जांच के दौरान सामने आए साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज से खुलासा हुआ कि जिस स्थान पर खुदाई की गई थी, वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था।
5 फरवरी की देर रात हुआ था हादसा
इसी लापरवाही के कारण 5 फरवरी देर रात को एक युवक अपनी बाइक सहित जलबोर्ड के खोदे हुए गहरे गड्ढे में जा गिरा, जिससे उसकी मौत हो गई। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक मनीष सिधावत ने राज्य का पक्ष रखते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता आस्था चतुर्वेदी और अधिवक्ता पूजा शर्मा ने अपनी दलीलें पेश कीं।
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपितों ने घटना के तुरंत बाद अपनी गलतियां छिपाने की कोशिश की थी। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि हादसे के बाद एक मजदूर मौके पर आनन-फानन में बैरिकेड्स और पर्दे लगा रहा था। इसके अलावा, मामले से जुड़े उप-ठेकेदार राजेश प्रजापति की नियमित जमानत याचिका को भी कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
इस दौरान हिमांशु गुप्ता के वकील ने तर्क दिया कि वे कंपनी के निदेशक पद से पहले ही निलंबित हो चुके थे और उस समय कंपनी का कामकाज रिजाल्यूशन प्रोफेशनल देख रहे थे। उन्होंने दावा किया कि इस कार्य से उनका कोई सीधा संबंध नहीं है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि एक युवा की जान जाना एक अत्यंत गंभीर मामला है। कोर्ट ने आशंका जताई कि आरोपित साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं या गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इन्ही आधारों पर अदालत ने राहत देने से इनकार करते हुए आरोपितों की हिरासत में पूछताछ को आवश्यक बताया है। |