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विधानसभा में गूंजी आलू किसानों की आवाज, विपक्ष संग सत्ता पक्ष ने भी गिनाईं दिक्कतें

Chikheang 8 hour(s) ago views 586
  



राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मंगलवार को विधान सभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आलू किसानों की समस्याएं उठाईं। कहा कि किसानों को बाजार में आलू के वाजिब दाम नहीं मिल रहे हैं, किसान परेशान हैं।

भाजपा सदस्य अर्चना पांडेय ने आलू किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए अपने विधान सभा क्षेत्र में आलू चिप्स की फैक्ट्री के साथ ही आलू आधारित उद्योग स्थापित किए जाने की मांग की।

भाजपा सदस्य संजीव कुमार सिंह दिवाकर ने भी अपने विधान सभा क्षेत्र में आलू आधारित उद्योग स्थापित किए जाने की मांग की।

बजट पर चर्चा करते हुए सत्ता पक्ष ने विश्वास और विकास का बजट कहा तो विपक्ष ने इसे दिशाहीन बताया। सपा सदस्यों में राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि विकास भाषणों और विज्ञापनों तक रह गया है।

राम खिलाड़ी सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की दिक्कतों को नहीं देख रही है। राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने कहा कि बजट दिशाहीन है, पूरा बजट खर्च करने की क्षमता सरकार में नहीं है।

शहजील इस्लाम अंसारी सवाल किया कि क्या यह बजट युवाओं को रोजगार और किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाएगा। महेंद्र नाथ यादव ने कहा कि बजट गरीब विरोधी है। ब्रजेश यादव के साथ ही सपा के अन्य कई सदस्यों ने बजट की आलोचना की।

भाजपा सदस्यों में गौरीशंकर वर्मा (कोरी) ने कहा कि यह बजट बुंदेलखंड के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

हर्षवर्धन वाजपेयी ने कहा कि यूपी की अर्थवस्था तेजी से बढ़ रही है। अनुपमा जायसवाल ने कहा कि यह बजट आंकड़ों का नहीं विकास का है। भाजपा सदस्य डा. विमलेश पासवान, ओपी श्रीवास्तव, डा. राधवेंद्र वर्मा, महेंद्र पाल सिंह आदि ने बजट की सराहना की।

निषाद पार्टी के सदस्य विपुल दुबे ने ने निषादों को अनुसूचित जाति में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग की। रालोद सदस्य डा. अजय कुमार ने भी बजट को बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित बताया।
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