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यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे प्रकृति का सुंदर नजारा, 100 एकड़ बंजर जमीन पर लगाए 65 हजार दुर्लभ और स्वदेशी पौधे

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हल्दीराम एजुकेशन सोसाइटी के सीएसआर फंड से यमुना एक्सप्रेसवे के साबौता इंटरचेंज पर मनोहर वन का नजारा। सौ. एचईएस



मनोज कुमार शर्मा, जेवर (ग्रेटर नोएडा)। ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे जेवर में दोनों तरफ बंजर पड़ी जमीन पांच साल बाद हल्दीराम एजुकेशन सोसायटी के सीएसआर फंड से प्रकृति का सुंदर नजारा पेश कर रही है। इस जमीन पर घने पेड़ों की हरियाली, झील और तालाबों के साथ एक शानदार जंगल बन चुकी है।

पांच साल पहले तत्कालीन जिलाधिकारी बीएन सिंह, सीएसआर सलाहकार सेवानिवृत्त आइपीएस प्रदीप श्रीवास्तव के प्रयासों से जिला प्रशासन, हल्दीराम एजुकेशन सोसायटी और जेपी इंफ्राटेक के बीच हुए समझौता हुआ था।

पांच साल बाद यह सपना साकार होता दिख रहा है बंजर जमीन पर लगाए गए 65 हजार पौधों ने सही देखभाल की वजह से 15 फीट के पेड़ों का रूप ले लिया है यह जंगल पक्षियों और जंगली जानवरों के लिए एक स्वर्ग बन गया है।

  

घने जंगल में तालाब के किनारे शानदार घूमने के लिए स्थान। जागरण

पांच वर्ष पूर्व 2019 में सरकार ने 100 एकड़ बंजर जमीन को कारपोरेट को लीज पर देने का फैसला किया। यमुना एक्सप्रेसवे पर सबौता कट पर बने इंटरचेंज के बीच चारों तरफ सड़क और ठीक बीचों बीच से एक्सप्रेसवे गुजरने के बाद दोनों किनारों पर बंजर जमीन पड़ी हुई थी। जमीन को समतल करते हुए झील, तालाब के अलावा तीन हिस्सों में बंट इस जमीन पर शुरुआत में बबूल के पौधे लगाने के बाद 65 हजार विभिन्न किस्मों के दुर्लभ और स्वदेशी पौधे लगाए गए।
एयरपोर्ट के नजदीक पर्यावरण संतुलन के शानदार नमूना बना मनोहर वन

मनोहर वन परिसर में जापानी मियावाकी तकनीकी अपनाते हुए 65 हजार पौधे लगाए गए। पानी की बर्बादी को रोकने और पेड़ों के लिए पर्याप्त नमी उपलब्ध कराने के लिए ड्रिप-इरिगेशन सिस्टम का जाल बिछाया गया। जल संचयन के लिए झील और कृत्रिम तालाब का निर्माण कराया गया।

इस सब के बाद अच्छी देखरेख और रखरखाव से आज सभी पौधे 15 फीट ऊंचे पेड़ का रूप ले चुके हैं। घने जंगल में सांप, मेंढ़क से लेकर नीलगाय, बंदर और विभिन्न पक्षियों के लिए सुंदर जगह बन चुकी है।

  

मनोहर वन में घने पेड़ोंके बीच सुंदर तालाब। जागरण
पक्षी और जानवरों को आकर्षित कर रहे दुर्लभ और फलदार पेड़

बंजर जमीन पर बनाए गए घने जंगल में देशभर के ग्रामीण क्षेत्रों में पाए जाने वाले पौधे नीम, पीपल, बरगद, अंजीर, पाकड़ ( पिलखन), इमली, सेमल, पलाश, बेल, कटहल और सहजन लगाए गए हैं। बहेड़ा, महुआ, हरड़, अर्जुन, कैथा जैसे दुर्लभ प्रजाति के पेड़ों को भी इस वन में शामिल किया गया है। पक्षियों को आकर्षित करने और उन्हें भोजन देने के लिए जामुन, आम, शहतूत, अंजीर और आंवला के पेड़ों का शानदार संगम है।
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