डॉ. मोहन गोप, धनबाद। डॉक्टर बनना हर किसी का सपना होता है। दसवीं से ही बच्चे इसके लिए खूब मेहनत करते हैं, तैयारी करते हैं, लेकिन कुछ फर्जी विद्यार्थियों के कारण कई प्रतिभावान वंचित रह जाते हैं। यही कुछ हुआ है शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमएमसीएच) में। फर्जी विद्यार्थियों के नामांकन के कारण इस वर्ष मेडिकल कालेज में एक एमबीबीएस की सीट खाली रह गई।
इस पर किसी विद्यार्थी का नामांकन नहीं हो पाया। बिहार का रहने वाले साहिल कुमार कुशवाहा ने गिरिडीह से फर्जी जाति (एससी कोटो) के आधार पर यहां नामांकन करा लिया था, एक माह पढ़ाई भी कर ली थी, इसके बाद पकड़े जाने पर साहिल का नामांकन तो रद्द कर दिया गया, लेकिन इस सीट पर कोई दूसरा विद्यार्थी का नामांकन विभाग और सरकार नहीं कर पाई है।
अब अस्पताल प्रबंधन में भी इस सीट को खाली घोषित कर दिया है। ऐसे में कई विद्यार्थी नामांकन के लिए इंतजार में रह गए। इस तरह से इस वर्ष मेडिकल कलेज में तीन विद्यार्थियों ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नामांकन ले लिया था।
ओबीसी छात्रा बन गई आदिवासी, पकड़ी गई
बंगाल पुरूलिया की रहने वाले अजीत कुमार दत्ता की पुत्री सुचरिता दत्ता अपनी ओबीसी कैटेगरी को छुपा लिया। वह आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) बन कर गोड्डा की शुंडमारा जाति प्रमाण बना लिया। यहां पर एक आदिवासी परिवार की वंशावली में छेड़छाड़ कर प्रमाण पत्र बना लिया। आठ नवंबर को नामांकन ले लिया। लेकिन छात्रा का टाइटल व रूप रंग से उस पर प्रबंधन को संदेह हुआ। जांच में गोड्डा अंचालाधिकारी ने सभी प्रमाण पत्रों को फर्जी बता दिया। इसके बाद छात्रा फरार हो गई, प्रबंधन ने सरायढेला थाना में केस किया।
यूपी का शुभम ने गिरिडीह से बनाई थी फर्जी प्रमाण
यूपी के महाराजगंज के पोस्ट भितौली बाजार, गांव परसा गिदही के संजय कुमार मिश्रा के पुत्र शुभम कुमार मिश्रा ने गलत तरीके से नामांकन ले लिया था। वह गिरिडीह मुफ्फसिल अंचल का रहने वाले बता दिया। यहां से 6 दिसंबर 2025 को फर्जी स्थानीय, आय औक इडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बना लिया था।
कॉलेज मेंं नामांकन हो गया। लेकिन छात्र की बोली भाषा से वह गिरिडीह से मेल नहीं खाया। प्रबंधक को शक हुआ, और जांच में प्रमाण पत्र फर्जी मिले। इस पर 10 नवंबर को सरायढेला थाना में केस किया गया। छात्र फरार है।
एक सीट के लिए प्राइवेट में 80 लाख से ज्यादा खर्च
एमबीबीएस की पढ़ाई लगातार महंगी होती जा रही है। एक प्राइवेट मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की पढ़ाई करने में लगभग 80 लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो रहे हैं। ऐसे मे सामान्य घरों के बच्चों के लिए इतनी बड़ी रकम किसी भी अभिभावक के लिए बस की बात नहीं। यही कारण है कि बच्चे नामांकन के लिए दिन रात मेहनत करते हैं। इसके बावजूद मेडिकल कालेज में एक सीट खाली रह गई। |
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