संवाद सूत्र, जागरण, बिदुपुर। बिदुपुर प्रखंड के चकसिकंदर स्थित राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय (जीईसी), वैशाली में तकनीकी कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।
महाविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग की ओर से वेरिलाग फॉर बिगनर्स विषय पर साप्ताहिक कार्यशाला का आयोजन किया गया है।
16 फरवरी से 22 फरवरी तक चलने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को आधुनिक तकनीकी ज्ञान से लैस करना है। कार्यशाला का शुभारंभ कन्वीनर प्रो. प्रियंका झा, कोआर्डिनेटर प्रो. प्रेरणा एवं प्रो. नेहा चौधरी, विभागाध्यक्ष डॉ. रवि रंजन तथा अन्य फैकल्टी सदस्यों और छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनंत कुमार ने कहा कि यह कार्यशाला बीटेक छात्र-छात्राओं के तकनीकी और व्यावहारिक कौशल को विकसित करने में मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि विभाग का यह कदम छात्रों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगा। विभागाध्यक्ष, संयोजक एवं समन्वयकों ने प्रतिभागियों को कार्यशाला के पाठ्यक्रम, उसकी उपयोगिता और आगामी सत्रों की रूपरेखा की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रो. इरफानूल हक, प्रो. निवेदिता सिंह, प्रो. कुमार विमल, डॉ. तृप्ता तथा प्रो. सुनैना सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
आयरलैंड से ऑनलाइन जुड़े क्वालकाम के विशेषज्ञ
कार्यशाला के प्रथम दिन मुख्य वक्ता के रूप में आयरलैंड से क्वालकाम के सीनियर आरएलडी डिजाइन इंजीनियर राहुल रंजन ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
उन्होंने वेरिलाग फार बिगनर्स विषय पर विस्तृत चर्चा करते हुए माड्यूल, डाटा प्रकार, माडलिंग के स्तर और सिंटेक्स जैसे तकनीकी पहलुओं पर सटीक जानकारी साझा की। विशेषज्ञ से सीधे संवाद कर छात्र-छात्राएं काफी उत्साहित नजर आए।
डिजिटल डिजाइनिंग की बारीकियों से कराया अवगत
कार्यशाला की संयोजक प्रो. प्रियंका झा ने बताया कि वेरिलाग में मुख्य रूप से तीन मॉडलिंग स्तर बिहेवियरल, डेटाफ्लो और स्ट्रक्चरल एवं गेट-लेवल होते हैं। ये स्तर किसी भी डिजिटल डिजाइन को उच्च-स्तरीय विवरण से लेकर सीधे गेट्स तक परिभाषित करने की अनुमति देते हैं।
उन्होंने कहा कि इसका व्यावहारिक ज्ञान छात्रों के करियर के लिए अत्यंत उपयोगी है। समन्वयकों ने बताया कि कार्यशाला में कम से कम 95 प्रतिशत उपस्थिति रखने वाले नियमित सफल छात्र-छात्राओं को ही प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। |