बिहार सिपाही भर्ती घोटाला। फाइल फोटो
संवाद सूत्र, फुलवारीशरीफ। बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े का मामला एक बार फिर सामने आया है। सोमवार को शारीरिक जांच के दौरान चार अभ्यर्थियों को दूसरे से लिखित परीक्षा दिलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
सभी अभ्यर्थी लिखित परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) में शामिल होने पहुंचे थे, जहां बायोमेट्रिक और दस्तावेजों की कड़ी जांच के दौरान फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ।
गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों में गया निवासी राघव सिंह, छपरा निवासी प्रज्ञा कुमार राज, नालंदा निवासी आयरन राज और पटना निवासी राजीव कुमार शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन सभी ने लिखित परीक्षा के दौरान अपने स्थान पर डमी कैंडिडेट को बैठाकर परीक्षा दी थी और उच्च अंक प्राप्त किए थे। शारीरिक दक्षता परीक्षा स्थल पर अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट और फोटो मिलान की प्रक्रिया के दौरान संदेह उत्पन्न हुआ।
बायोमेट्रिक डेटा और लिखित परीक्षा के समय दर्ज रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने पर अधिकारियों ने चारों से गहन पूछताछ की। पूछताछ में विरोधाभास सामने आने के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर विस्तृत जांच शुरू की, जिसमें फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई।
फर्जीवाड़े का संगठित गिरोह
प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि यह कार्य किसी संगठित गिरोह के माध्यम से किया गया है, जो मोटी रकम लेकर अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाकर परीक्षा दिलवाता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस बार विशेष सतर्कता बरती जा रही है। हर चरण में बायोमेट्रिक सत्यापन, फोटो मिलान और दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। इसके बावजूद फर्जीवाड़ा करने वाले नए-नए तरीके अपना रहे हैं।
पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। साथ ही संबंधित परीक्षा केंद्रों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े बिंदुओं की भी समीक्षा की जा रही है।
यह भी पढ़ें- यूपी और बिहार के किसानों के लिए गेम चेंजर साबित होगी टेक्नोलॉजी, AI और रोबोटिक्स से की जाएगी स्मार्ट खेती
यह भी पढ़ें- Bihar News: सासाराम में 7 अरब की लागत से बन रहा नया जंक्शन, 3 रेल लाइनों से होगी कनेक्टिविटी |
|