तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पीड़ित युवती एनसीसी के ‘सी’ सर्टिफिकेट की परीक्षा देने के लिए मऊ गई थी। लौटते समय जैसे ही स्टेशन पर पहुंची भीड़ और हड़बड़ी में वह टिकट नहीं ले सकी। ट्रेन में बैठने के बाद जब टीटीई ने उससे पूछताछ की, तो उसे उम्मीद थी कि नियम के तहत जुर्माना लेकर सीट दे दी जाएगी। लेकिन, भरोसे की आड़ में उसके साथ घिनौनी वारदात हुई।
पीड़िता ने बताया कि वह सेना में भर्ती की तैयारी कर रही है और एनसीसी का ‘सी’ सर्टिफिकेट उसके लिए बेहद अहम था। लौटते समय जल्दबाजी में टिकट नहीं ले पाई। ट्रेन में बैठने के बाद टीटीई ने पहले उसका नाम-पता और परीक्षा से जुड़ी जानकारी पूछी। जब उसे पता चला कि वह एनसीसी कैडेट है और गोरखपुर में तैयारी कर रही है, तो उसने सीट दिलाने का भरोसा दिया। युवती का आरोप है कि टीटीई ने उसे विश्वास में लेकर अपने साथ एसी प्रथम श्रेणी कोच के केबिन में ले गया।
वहां पहुंचने के बाद पहले सामान्य बातचीत की, लेकिन कुछ ही देर में उसका व्यवहार बदल गया। जब उसने विरोध किया तो वह बिना टिकट यात्रा का हवाला देकर कार्रवाई की धमकी देने लगा। घटना के बाद उसने 112 नंबर पर काल किया और स्वजन को भी बताया।
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आरोपित टीटीई ने की नियमों की अनदेखी
रेलवे नियमों के अनुसार यदि कोई यात्री बिना टिकट ट्रेन में सवार हो जाता है तो टीटीई उसे नियमानुसार जुर्माना लगाकर वैध टिकट जारी करता है और जनरल कोच में भेज देता है। ऐसी स्थिति में यात्री को ट्रेन से उतारना या अलग-थलग ले जाना नियमों के विरुद्ध है।
लेकिन इस प्रकरण में दुष्कर्म के आरोपित टीटीई ने प्रक्रिया का पालन करने के बजाय युवती को सीट दिलाने का भरोसा दिया और उसे कोच के केबिन में ले गया। इस घटना ने ट्रेन में महिला यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एसी प्रथम श्रेणी जैसे संवेदनशील कोच में किसी महिला यात्री को अकेले केबिन में ले जाने की अनुमति कैसे दी गई और निगरानी तंत्र कहां था, यह भी बड़ा सवाल है। |
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