पत्रकारों को पेंशन के लिए अनुमान्य शर्तें ही लागू : मंत्री विजय कुमार चौधरी
राज्य ब्यूरो, पटना। संसदीय कार्य, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री विजय कुमार चौधरी ने जेपी सेनानी पेंशन के अनुरुप सेवानिवृत्त सभी पत्रकारों को पेंशन देने से जुड़े सवाल पर कहा कि जो पत्रकारों को पेंशन के लिए अन्य राज्यों में अनुमान्यता की शर्तें हैं, वही अपने बिहार में भी लागू हैं। 20 वर्ष की सेवा तो अनिवार्य है।
टीडीएस और पीएफ तो बीस वर्षों की नौकरी का प्रमाण है। अगर बीस वर्ष की सेवा अवधि है तो जिस कंपनी में उन्होंने नौकरी की है, उसका प्रमाण देने में क्या दिक्कत है। यह तो अच्छी बात है। जितना पेंशन बिहार सरकार दे रही है, उतना किसी दूसरे राज्य में नहीं दिया जा रहा है।
इतना ही नहीं फैमिली पेंशन की अनुमान्यता जो बिहार में है, वह किसी दूसरे राज्य में नहीं है। सोमवार को विधानसभा में विभूतिपुर से माकपा के विधायक अजय कुमार ने सवाल पूछा था।
अजय कुमार ने सरकार से सवाल पूछा था कि पत्रकार पूरी जिंदगी चौथे स्तंभ के रूप में सेवा करते हैं। बिहार के कई प्रखंडों और जिलों में वह बिना टीडीएस कटौती और पीएफ के लिए कंपनियों के लिए काम करते हैं। बिहार में केवल 75 पत्रकारों को ही पेंशन का लाभ मिलता है। क्या बिहार में केवल 75 पत्रकार ही हैं?
उन्होंने कहा कि पीएफ और टीडीएस कटौती की शर्त तो कंपनी पर आधारित है। मेरा प्रश्न है कि जेपी सेनानियों की तरह पत्रकारों की कमेटी (विधानसभा के अंदर ही) बनाकर, पत्रकारों की पुष्टि करवाकर सरकार उन्हें पेंशन सरकार देना चाहती है या नहीं? विजय चौधरी ने कहा कि जेपी सेनानियों और पत्रकारों को पेंशन देने की योजना की शर्तें अलग-अलग इसलिए हैं क्योंकि यह दोनों एक कैटेगरी के लोग नहीं हैं। जेपी सेनानी को तो बाद में पेंशन दिया गया। जिस वक्त आंदोलन चला, उस वक्त तक की बात है। वह दूसरी बात है।
उन्होंने विधायक से कहा कि आप कम संख्या में पत्रकारों को पेंशन देने की जो बात कह रहे हैं, तो मैं बता दूं कि सरकार ने संख्या को लेकर कोई सीमा नहीं लगाई है। मेरा कहना है कि कम से कम सेवा अवधि की अनुमान्यता की सभी राज्यों में ऐसा ही है। विधायक के पूरक पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सरकार शर्त्तों में छूट पर विचार करेगी। कहा कि सरकार विचार करेगी। |