ईशान ने लगाया था अर्धशतक
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। पटना के 27 वर्षीय विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन के लिए बीते दो साल किसी रोलर-कोस्टर से कम नहीं रहे। भारतीय टीम का 2024 का दक्षिण अफ्रीका का दौरा, जब ईशान बीच में सीरीज छोड़कर भारत लौट गए थे।
बीसीसीआई ने उन्हें रणजी ट्रॉफी पर आईपीएल को प्राथमिकता देने के कारण केंद्रीय अनुंबध से बाहर कर दिया गया था और एक समय ऐसा आया जब भारतीय क्रिकेट व्यवस्था उनके बिना ही आगे बढ़ने को तैयार दिख रही थी।
ईशान की जगह नहीं बन रही थी
टीम में ऋषभ पंत की धमाकेदार वापसी हो चुकी थी, ध्रुव जुरैल अपनी छाप छोड़ रहे थे, संजू सैमसन और जितेश शर्मा जैसे विकल्प भी मौजूद थे। ऐसे में चयन क्रम में पांचवें नंबर पर खिसक चुके ईशान के लिए फिर से भारतीय टीम में जगह बनाना बेहद कठिन दिख रहा था। इस दौरान इस वामहस्त बल्लेबाज ने क्रिकेट से एक ब्रेक लेने का फैसला किया। मानसिक और भावनात्मक थकान ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था, यह धारणा बना दी गई कि वह घरेलू क्रिकेट को गंभीरता से नहीं ले रहे।
खुद को फिर से गढ़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी
ईशान ने इन आलोचनाओं का कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया। उनके करीबी मित्र और ईशान किशन क्रिकेट अकादमी के सह-संस्थापक अंशुमत श्रीवास्तव बताते हैं कि ईशान ने उसी दिन से खुद को फिर से गढ़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। उन्होंने वर्तमान में जीना सीखा। प्रक्रिया उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण हो गई। ईशान के जीवन की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई।
उन्होंने ध्यान (मेडिटेशन) शुरू किया, पिता प्रणव पांडेय के कहने पर श्रीमदभगवद् गीता पढ़नी शुरू की। वह दिन में दो बार अपनी अकादमी में कौशल प्रशिक्षण करते। होटल का खाना छोड़कर निजी शेफ रखा ताकि पोषण पर पूरा ध्यान रहे। नींद और आराम का विशेष ख्याल रखा जाने लगा।
परिवार बन गया कवच
ईशान की वापसी के सफर में परिवार ने मजबूत कवच का काम किया। बड़े भाई राज किशन, जो पेशे से डाक्टर हैं और खुद जूनियर क्रिकेट खेल चुके हैं और वह तकनीकी सलाह में अहम भूमिका निभाते रहे। अंशुमत बताते हैं कि राज से बेहतर ईशान के खेल को कोई नहीं समझता। नेट्स में घंटों सिमुलेशन ट्रेनिंग ने उनके शाट चयन में स्पष्टता लाई। पावरप्ले में कितने रन बनाने हैं, किस गेंदबाज पर कैसे हमला करना है, इन सभी पर मानसिक तैयारी की गई। यही स्पष्टता हाल के मैचों में दिखी, जब उन्होंने दबाव भरी परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया।
ईशान का स्वभाव आज भी वही है, मजाकिया, हल्के-फुल्के और टीम में सकारात्मक ऊर्जा फैलाने वाले, लेकिन अब उनकी मानसिक मजबूती पहले से कहीं ज्यादा परिपक्व है। पाकिस्तान के विरुद्ध शानदार पारी के बाद भी होटल लौटकर उन्होंने सबसे पहले रिकवरी पर ध्यान दिया, क्योंकि अगला मुकाबला सामने था।
अंशुमत कहते हैं, ईशान ने अपनी मेहनत से उम्मीदें जोड़ना बंद कर दिया है। वह निस्वार्थ होकर खेलते हैं। झारखंड की कप्तानी करते समय भी उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि ऐसे खेलूंगा तो वापसी हो जाएगी। भारत के लिए खेलने के लिए उन्हें खुद को पहले बेहतर इंसान और खिलाड़ी बनाना था। आज ईशान किशन की वापसी सिर्फ रन बनाने की कहानी नहीं है, बल्कि आत्ममंथन, अनुशासन और मानसिक मजबूती की मिसाल है। उन्होंने साबित कर दिया कि आलोचनाओं के शोर के बीच भी अगर प्रक्रिया पर विश्वास रखा जाए, तो वापसी की नई इबारत जरूर लिखी जा सकती है।
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