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ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम स्थित चौरासी कुटिया में चल रहा निर्माण कार्य। जागरण
दीपक सेमवाल, ऋषिकेश। राजाजी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत प्रकृति की खूबसूरत वादियों में बनी चौरासी कुटिया 16 महीने बाद (अप्रैल 2027) नये कलेवर में नजर आएंगी।
मूल स्वरूप में किसी तरह की छेड़छाड़ किए बिना इसी वर्ष जनवरी से यहां 84 ध्यान कुटियाओं समेत अन्य ऐतिहासिक भवनों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हो गया है। इस पर 101 करोड़ की लागत आएगी।
भावातीत ध्यान योग के लिए विश्व विख्यात महर्षि महेश योगी ने वर्ष 1961 में स्वर्गाश्रम (ऋषिकेश) के पास वन विभाग से 15 एकड़ भूमि लीज पर लेकर यहां शंकराचार्य नगर की स्थापना की थी।
फिर यहां उन्होंने अद्भुत वास्तु शैली वाली चौरासी छोटी-छोटी कुटिया और सौ से अधिक गुफाओं का निर्माण कर इस जगह को ध्यान-योग केंद्र के रूप में विकसित किया। साथ ही साधकों के रहने के लिए केंद्र में 135 गुंबदनुमा कुटिया भी हैं।
अतिथियों के लिए तीन मंजिला अथिति गृह, बड़ा सभागार, महर्षि ध्यान विद्यापीठ और महर्षि का आवास बना हुआ है। 84 कुटिया और अन्य आवासों को गंगा से निकले छोटे पत्थरों से सजाया गया है।
वर्ष 1980 में इस क्षेत्र के राजाजी नेशनल पार्क (अब राजाजी टाइगर रिजर्व) की सीमा में आने के बाद वर्ष 1985 में इसे बंद कर दिया गया।
नतीजा, तीन दशक तक योग-ध्यान एवं साधना का यह केंद्र आमजन की पहुंच से दूर रहा। इन वर्षों में यह धरोहर खंडहर में तब्दील होती गई। आठ दिसंबर 2015 को राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन ने चौरासी कुटी को नेचर ट्रेल और बर्ड वाचिंग के लिए खोला।
इसके पीछे मकसद महर्षि महेश योगी और यहां से जुड़े रहे पश्चिम के मशहूर बैंड बीटल्स ग्रुप की स्मृतियों को भी नई पहचान देना था। अब यहां मूल स्वरूप में बदलाव किए बिना काम शुरू हो गया है।
यह होने हैं काम
योजना के तहत चौरासी कुटिया में कैफे, योग-ध्यान हाल, पौराणिक रसोई, हर्बल गार्डन, कुटियाओं व अतिथि गृह का काम होना है। कुटियाओं के अंदर नये सिरे से प्लास्टर किया जा रहा है। जो पत्थर निकल गए हैं, उन्हें ठीक कराया जा रहा है। इसके अलावा पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रवेश व निकासी द्वार, नया टिकट काउंटर व वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी यहां होगी।
अभी यह है व्यवस्था
अभी यहां प्रवेश के लिए भारतीय पर्यटकों से प्रति व्यक्ति 200 रुपये और विदेशी पर्यटकों से 1,200 रुपये शुल्क लिया जाता है। सुबह दस बजे इसे पर्यटकों के लिए खोला जाता है और अपराह्न 3.30 बजे तक एंट्री होती है। शाम चार बजे पर्यटकों को यह स्थल छोड़ना पड़ता है।
बीटल्स ने दी नई पहचान
इस स्थान को देश-दुनिया में प्रसिद्ध महर्षि महेश योगी और भावातीत ध्यान के कारण ही नहीं, इंग्लैंड के मशहूर म्यूजिकल बैंड द बीटल्स की वजह से भी नई पहचान मिली।
इंग्लैंड के लिवरपूल के चार युवकों जान लिनोन, पाल मैक-कार्टने, रिंगो स्ट्रार्र और जार्ज हेरिसन ने वर्ष 1960 में इस बैंड की स्थापना की थी। 16 फरवरी 1968 को ये युवक अपनी पत्नियों और महिला मित्र के साथ पहली बार ऋषिकेश महर्षि महेश योगी के ध्यान केंद्र में आए थे।
नशे के आदी ये चारों युवक नशे के जरिये शांति तलाशने यहां आए थे, लेकिन यहां महर्षि के संपर्क में आने के बाद योग एवं अध्यात्म के अनुभव ने उनकी जिंदगी और जीने का नजरिया ही बदल डाला।
करीब 45 दिन महर्षि के आश्रम में रहे बीटल्स से जुड़े ये चारों युवा \“फैब फोर\“ के नाम से मशहूर हुए।
जिस नशे के जरिये फैब फोर शांति की खोज कर रहे थे, वही अब नशे की दुनिया छोड़ योग एवं अध्यात्म की दुनिया में इस कदर लीन हो गए कि यहां के शांत वातावरण में उन्होंने \“ॐ शांति\“ का जाप करते हुए 48 गीतों की रचना कर डाली।
इन गीतों ने व्हाइट एलबम और ऐबी रोड नामक पाश्चात्य एलबम में जगह पाकर दुनियाभर में धूम मचाई। इसके बाद इसे बीटल्स आश्रम के नाम से भी जाना जाने लगा।
स्वर्गाश्रम के पास शंकराचार्य नगर स्थित चौरासी कुटिया में काम शुरू हो गया है। लोक निर्माण विभाग इसका काम कर रहा है। लगभग सोलह माह काम में लगने की संभावना है।
- आरसी जोशी, रेंजर, गौहरी रेंज, राजाजी टाइगर रिजर्व
स्वर्गाश्रम स्थित चौरासी कुटिया में चल रहा निर्माण कार्य। जागरण
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