search

पोस्ट ग्रेजुएट अनीता का कमाल: गांव से निकलकर बन गईं शहद कंपनी की मालकिन; ₹14 लाख तक इनकम

cy520520 1 hour(s) ago views 281
  

दो बी-बॉक्स से शुरू कर बनाई शहद कंपनी (जागरण)



अमित सौरभ, सीतामढ़ी। कभी दो बी-बॉक्स से मधुमक्खी पालन शुरू करने वाली सीतामढ़ी की अनीता कुशवाहा आज मेहनत और लगन से शहद कंपनी चला रही हैं। इस व्यवसाय से सालाना 14 लाख रुपये से अधिक की आय कर रही हैं। उनकी सफलता की कहानी अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की चौथी कक्षा की पाठ्यपुस्तक में शामिल की गई है।

सीतामढ़ी के नानपुर की रहने वाली अनीता का मायका मुजफ्फरपुर के बोचहां प्रखंड अंतर्गत पटियासा जलाल गांव में है। अनीता पिछले 25 वर्षों से मधुमक्खी पालन से जुड़ी हैं।

उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि आसपास के लोगों को भी मधुमक्खी पालन और शहद मार्केटिंग का प्रशिक्षण दिया। वर्ष 2002 में उन्होंने मात्र दो बॉक्स से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी। वर्ष 2013 में अनीता की शादी नानपुर दक्षिणी निवासी संजय कुशवाहा से हुई।

पति के सहयोग से 2021 में उन्होंने नानपुर में प्रोसेसिंग प्लांट लगाया। सीतामढ़ी के साथ-साथ मुजफ्फरपुर में भी उनकी दुकान संचालित है, जहां से पूरे देश में कुरियर के माध्यम से शहद की आपूर्ति की जाती है। अनीता न केवल खुद आर्थिक रूप से सशक्त बनी हैं, बल्कि शिक्षा की अहमियत को भी समझा रही हैं। उन्होंने खुद पोस्ट ग्रेजुएशन किया और अपनी मां को भी पढ़ना-लिखना सिखाया।

  

अनीता बताती हैं कि वर्ष 2002 में उन्होंने मात्र दो बॉक्स से मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी। इन दो बॉक्स को खरीदना भी उनके लिए आसान नहीं था। बचपन से पढ़ाई का शौक होने के बावजूद आर्थिक तंगी के कारण नियमित स्कूल नहीं जा पाती थीं। कक्षा पांच तक निःशुल्क पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई मुश्किल हो गई।

ऐसे में कक्षा छह से ही उन्होंने छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया और उसी से पैसे बचाने लगीं। गांव के लीची बागानों में बाहर से आने वाले मधुमक्खी पालकों से प्रेरित होकर उन्होंने इस व्यवसाय में कदम रखा। ट्यूशन से बचाए दो हजार रुपये और परिवार से मिले तीन हजार रुपये मिलाकर कुल पांच हजार रुपये में दो बॉक्स खरीदे।

आज उनके पास करीब 450 बी-बॉक्स हैं, जिनसे सालाना लगभग 15 हजार किलो शहद का उत्पादन होता है। वर्तमान में वे सरसों, लीची, जामुन, तुलसी सहित कई फूलों से शहद संग्रह कर रही हैं। शहद का उचित मूल्य न मिलने पर अनीता ने खुद की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का फैसला किया।

  

वह बताती हैं कि गांव के अधिकांश मधुमक्खी पालक जानकारी के अभाव में शहद मात्र 80 रुपये प्रति किलो बेचने को मजबूर थे। इसे देखते हुए उन्होंने शहद की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग शुरू की। पिछले दो वर्षों से ‘अनीता \“\“s शहद’ ब्रांड के तहत शहद 300 से 400 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

अनीता न केवल अपने शहद की प्रोसेसिंग करती हैं, बल्कि अन्य किसानों के शहद का भी प्रसंस्करण कर उन्हें सीधे बाजार से जोड़ती हैं। उनके पति बताते हैं कि वे लीची, जामुन, तुलसी, सहजन और करंज जैसे फूलों के शहद निकालते हैं और इसके लिए अलग-अलग राज्यों में बी-बॉक्स लेकर जाते हैं।

आज अनीता कुशवाहा की कहानी एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक में पढ़कर बच्चे प्रेरणा ले रहे हैं। यह कहानी साबित करती है कि आत्मविश्वास और मेहनत से कोई भी सपना साकार किया जा सकता है।

यह भी पढ़ें- B.Tech ग्रेजुएट ने मुर्गी पालन से बदली तकदीर, 50 हजार का लोन लेकर किया बिजनेस; ₹6 लाख तक इनकम
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
158433