न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में मोतियाबिंद सर्जरी के बाद संक्रमण का मामला। जागरण
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। सिकरीगंज के जद्दूपट्टी स्थित न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में एक फरवरी को हुई मोतियाबिंद सर्जरी के बाद संक्रमण के गंभीर मामले में दो और मरीजों की आंख निकालनी पड़ी है। अब तक कुल 12 रोगियों की आंख निकाली जा चुकी हैं। ताजा मामलों में बनकटा निवासी 75 वर्षीय दीनानाथ और बारीगांव की शेखा देवी शामिल हैं।
दोनों का उपचार एम्स, दिल्ली में हुआ, जहां संक्रमण बढ़ने के कारण चिकित्सकों ने आंख निकालने का निर्णय लिया। दीनानाथ रविवार को एम्स से घर लौट आए, शेखा देवी का उपचार अभी जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बारीगांव पहुंचकर शंकरावती देवी का बयान दर्ज किया, उनकी भी आंख पिछले दिनों निकाल दी गई थी।
दीनानाथ के पुत्र हनुमान ने बताया कि एक फरवरी की शाम पांच बजे न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल में पिताजी की आंख का आपरेशन हुआ था। दो घंटे बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। हम लोग उन्हें लेकर घर आ गए लेकिन रात 12 बजे आंख में दर्द होने लगा। भोर में चार बजे उन्हें लेकर हम लोग पुन: अस्पताल पहुंचे।
एक घंटे में डाक्टरों ने छह इंजेक्शन लगाए लेकिन दर्द कम नहीं हुआ। उन्हें लेकर हम लोग गोरखपुर चले गए, वहां डाक्टर ने बताया कि आंख में गंभीर संक्रमण हो गया है। इसके बाद हम लोग उन्हें लेकर एम्स दिल्ली चले गए। वहां डाक्टरों ने गंभीर संक्रमण के कारण उनकी आंख निकालने का निर्णय लिया।
पुन: 21 फरवरी को फालोअप के लिए बुलाया गया है। ठीक होने के बाद अस्पताल पर कार्रवाई के लिए हम लोग शिकायत करेंगे। शेखा देवी के पुत्र रमेश ने बताया है कि मेरी मां की आंख 12 फरवरी को एम्स दिल्ली में निकाली गई, उनका उपचार चल रहा है।
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इस मामले पर दैनिक जागरण में चार फरवरी को खबर छपने के दूसरे दिन ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल पहुंचकर प्रबंधक, डाक्टर व कर्मचारियों का बयान ले लिया था। लेकिन मरीज लखनऊ, वाराणसी व दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती थे। इसलिए उनका बयान नहीं लिया जा सका था। जैसे-जैसे रोगी अस्पताल से घर लौट रहे हैं, विभाग की टीम उनका बयान दर्ज कर रही है।
रविवार को पीएचसी प्रभारी उरुवा डा. जेपी तिवारी के नेतृत्व में टीम रहदौली निवासी मरीज शंकरावती देवी के घर गई। उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उनका बयान दर्ज किया। पांच फरवरी को इनकी आंख निकाली गई थी।
जिस गांव के मरीज हैं, उससे संबंधित सीएचसी-पीएचसी के अधीक्षकों-प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि जो मरीज घर लौट रहे हैं, उनका बयान दर्ज किया जाए। इसे जांच में शामिल किया जाएगा। जांच लगभग पूरी हो चुकी है, केवल मरीजों का बयान ही लिया जाना शेष है। इसके बाद रिपोर्ट मजेस्ट्रियल जांच समिति को सौंप दी जाएगी। -
-डाॅ. राजेश झा, सीएमओ |