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चांदन नदी पर गाइडवाल निर्माण से खेतों तक पहुंचेगा पानी (जागरण)
संवाद सूत्र, बांका। आने वाले समय में किसानों को सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर नहीं रहना होगा। पिछले कुछ साल से लगातार जिले में सिंचित क्षेत्र का रकबा बढ़ रहा है। इसके लिए आहार-पाइन के जीर्णोद्धार का काम तेजी से चल रहा है।
चांदन नदी के रजौन क्षेत्र के आसपास पांच स्थानों पर गाइडवाल का निर्माण कराया जा रहा है, जिससे नदी के पानी को आहार-पाइन की ओर मोड़कर खेतों तक पहुंचाया जा सके।
लघु सिंचाई विभाग की ओर से आहार-पाइन के जीर्णोद्धार का कार्य प्राथमिकता के आधार पर चल रहा है। कटियामा पाइन, मधुवन पाइन और चकोलिया पाइन सहित कई पाइन का कार्य प्रगति पर है, जबकि कुछ का जीर्णोद्धार पूरा हो चुका है। अब नदी के मुहाने पर गाइडवाल निर्माण से जल प्रवाह को नियंत्रित कर पाइन में पर्याप्त पानी पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
स्थानीय किसान मुरारी सिंह और राजेश कुमार ने बताया कि पहले नदी का बेड लेवल ऊंचा था, लेकिन बालू उठाव के कारण नदी गहरी हो गई है। ऐसे में पाइन की खोदाई नदी के बेड लेवल के अनुरूप की जा रही है, ताकि पानी का प्रवाह सुचारु रहे।
जरूरत के अनुसार चेकडैम और फुटब्रिज
गाइडवाल के साथ-साथ कई जगहों पर चेकडैम और फुटब्रिज का भी निर्माण हो रहा है। इससे किसान पंपसेट के जरिए भी सिंचाई कर सकेंगे। औसतन चार से पांच फीट तक खुदाई कर लेवल मेंटेन किया जा रहा है। किसानों का कहना है कि इससे दो के बजाय तीन फसल लेने का रास्ता खुलेगा और गरमा मूंग जैसी फसल भी संभव होगी।
नई योजनाओं का सर्वे
जिन आहार-पाइन या बड़े तालाब का जीर्णोद्धार नहीं हो सका है, उसका भी सर्वे किया जा रहा है। जल्द ही प्रशासनिक स्वीकृति के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। अधिकारियों के अनुसार इस पर काम तेजी से चल रहा है।
ज्ञात हो कि लंबे समय से ज्यादातर आहार-पाइन का जीर्णोद्धार नहीं होने के कारण सबसे अधिक परेशानी हो रही थी। साल 2020-21 में छह विभागों की ओर से सर्वे कराया गया था। उसमें करीब 252 आहार-पाइन चिह्नित किए गए थे। उसी के आधार पर दो साल पहले प्रशासनिक स्वीकृति और टेंडर की प्रक्रिया की गई। अब काम आखिरी चरण में है।
आहार-पाइन के जीर्णोद्धार का काम तेजी से चल रहा है। चांदन नदी में पांच जगहों पर गाइडवाल का निर्माण कराया जा रहा है। खेतों तक नदी का पानी पहुंचे, इसके लिए लेवल भी मेंटेन किया जा रहा है। - संजय कुमार, एसडीओ, लघ़ु सिंचाई विभाग |
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