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Surya Grahan 2026: बंद कपाटों के बीच कैसे करें पूजा? जानें ग्रहण काल से जुड़ी जरूरी बातें

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Surya Grahan 2026: ग्रहण में क्यों पूजा-पाठ करना मना होता है (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2026) को केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक समय माना जाता है। आपने देखा होगा कि ग्रहण लगते ही मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। यही नहीं, पूजा-पाठ रोक दिया जाता है और मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित माना जाता है। इसके पीछे कई गहरे धार्मिक और वैज्ञानिक कारण छिपे हैं।
क्यों वर्जित है मूर्ति पूजा?

धार्मिक दृष्टि से ग्रहण काल को \“सूतक काल\“ कहा जाता है, जो एक प्रकार की अशुद्धि का समय माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं और खगोल शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय राहु-केतु के प्रभाव के कारण ब्रह्मांड में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) का प्रवाह बढ़ जाता है। देव-प्रतिमाएं अत्यंत संवेदनशील और ऊर्जा का केंद्र होती हैं, इसलिए इस नकारात्मकता से उनकी पवित्रता को बचाने के लिए मूर्तियों को ढक दिया जाता है या मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
नकारात्मक ऊर्जा और वैज्ञानिक आधार

ग्रहण के समय प्रकृति में कई बदलाव आते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूर्य से निकलने वाली किरणें दूषित हो जाती हैं, जो मानव शरीर और आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। यही कारण है कि इस समय घर के अंदर रहने और बाहरी पूजा-पाठ से बचने की सलाह दी जाती है।
मानसिक जप का विशेष महत्व

भले ही मंदिरों में बाहरी पूजा वर्जित हो, लेकिन यह समय अंतर्मन की साधना के लिए श्रेष्ठ है। ग्रहण के दौरान किया गया \“मानसिक जप\“ (बिना बोले मन में मंत्र पढ़ना) सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक शक्तिशाली होता है। इस समय गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का मन ही मन जप करना सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।

  

(Image Source: Freepik)
ग्रहण के बाद शुद्धिकरण

ग्रहण समाप्त होते ही शुद्धिकरण की प्रक्रिया जरूरी मानी गई है। शास्त्रों में उल्लेख है कि ग्रहण के बाद गंगाजल का छिड़काव करना, स्नान करना और नए कपड़े धारण कर दान-पुण्य करना व्यक्ति को ग्रहण के दोषों से मुक्त करता है। इसके बाद ही मंदिरों की सफाई कर दोबारा कपाट खोले जाते हैं।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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