घटना के वादी राजदेव के मौखिक साक्ष्य और पुलिस कार्रवाई में मिला अंतर
सीडीआर व बरामदगी से जुड़े प्रमाण पेश न करने पर आरोपितों को मिला लाभ
जागरण संवाददाता, संतकबीर नगर। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम गजेंद्र की अदालत ने वर्ष 2010 में थाना धर्मसिंहवा क्षेत्र में हुई डकैती के मामले में नामजद पांच आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। बरी किए गए आरोपितों में शमशेर पुत्र अब्दुल रहमान निवासी ग्राम दुर्गजोत, थाना बखिरा, अवधेश उर्फ गब्बू पुत्र बद्री निवासी ग्राम बेलौहा, थाना खेसरहा, जनपद सिद्धार्थनगर, पवन बरनवाल पुत्र प्रहलाद बरनवाल निवासी बखिरा, असगर पुत्र मोहर अली निवासी ग्राम दुर्गजोत, थाना बखिरा तथा विच्छन पुत्र बुचनू निवासी ग्राम दुर्गजोत, थाना बखिरा शामिल हैं।
वादी राजदेव निवासी महदेवा नानकार की तहरीर पर थाना धर्मसिंहवा में मुकदमा दर्ज हुआ था। शिकायत के अनुसार 11–12 अगस्त 2010 की रात करीब एक बजे कुछ बदमाशों ने घर में घुसकर विवाह हेतु रखे 10 थान जेवर, 21 हजार रुपये नकद, पत्नी के 6 थान जेवर तथा करीब 25 साड़ियां लूट ली।
विरोध करने पर हमलावरों ने डंडे और रॉड से मारपीट भी की। विवेचना के दौरान कई आरोपितों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में प्रेषित किए गए थे। सह-अभियुक्त सर्वजीत द्वारा जुर्म स्वीकार करने पर उसे दोषी ठहराया गया, जबकि एक अन्य आरोपित की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई और एक की पत्रावली पृथक कर दी गई।
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अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि वादी के मौखिक साक्ष्य और पुलिस कार्रवाई में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया। डकैती में मोबाइल लूटे जाने, सर्विलांस के आधार पर गिरफ्तारी और माल बरामदगी के दावों के समर्थन में न तो संबंधित पुलिस अधिकारी का बयान न्यायालय में कराया गया और न ही कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) प्रस्तुत किया गया। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में शेष आरोपितों को दोषमुक्त किया जाता है। |