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CISF के 500 इंस्पेक्टरों 30-34 साल की सेवा में मिला सिर्फ एक प्रमोशन, सुप्रीम कोर्ट ने दिया कैडर रिव्यू का आदेश

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CISF के 500 इंस्पेक्टरों 30-34 साल की सेवा में मिला सिर्फ एक प्रमोशन (फाइल फोटो)



पीटीआई, नई दिल्ली। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) के 500 से अधिक इंस्पेक्टरों ने प्रार्थना पत्र देकर समयबद्ध प्रोन्नतियां सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष रूप से कैडर समीक्षा की मांग की है। उनका कहना कि वे अपने करियर में \“\“अभूतपूर्व\“\“ ठहराव का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने 30 से 34 वर्ष के करियर में सिर्फ एक प्रोन्नति मिली है।

इन अधिकारियों ने अपने मुख्यालय को कई प्रार्थना-पत्र भेजे हैं, जिसमें उनके पक्ष में जारी सुप्रीम कोर्ट के दो फरवरी के आदेश का जिक्र किया गया है। शीर्ष अदालत ने विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हुए निर्देश दिया था कि सीआइएसएफ के लिए कैडर समीक्षा का कार्य तीन महीने के अंदर पूरा किया जाए।

सीआइएसएफ में इंस्पेक्टरों को शुरुआत में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर भर्ती किया जाता है। उनकी अगली प्रोन्नति इंस्पेक्टर के तौर पर होती है और उसके बाद असिस्टेंट कमांडेंट का पद होता है, जो प्रवेश स्तर के राजपत्रित अधिकारी की रैंक है। वर्तमान में लगभग दो लाख कर्मियों के बल में लगभग 3,000 इंस्पेक्टर और लगभग 17,000 सब-इंस्पेक्टर हैं।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इंस्पेक्टर स्तर से लेकर असिस्टेंट कमांडेंट के पद तक ठहराव है। उनका कहना है कि कई लोग तीन दशक से अधिक की बेदाग सेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उन्हें सिर्फ एक प्रमोशन (इंस्पेक्टर) मिला है। करियर में यह ठहराव गंभीर भेदभाव, मनोबल में कमी और उनके बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन का कारण है।

एक वरिष्ठ सीआइएसएफ अधिकारी ने कहा कि ग्रुप \“ए\“ सर्विस अधिकारियों के लिए कैडर की समीक्षा चल रही है और यह कर्मचारियों के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष तरीके से की जाएगी।

इंस्पेक्टरों ने अपने करियर में इस अभूतपूर्व ठहराव की वजह प्रोन्नति कोटे में \“\“सुनियोजित\“\“ कमी, दूसरे केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के मुकाबले रैंक की स्थिति में \“\“अनियमितता\“\“ और कैडर प्रबंधन पर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करना बताया है।

उन्होंने सीआरपीएफ, बीएसएफ, आइटीबीपी और एसएसबी जैसे दूसरे सीएपीएफ के साथ बराबरी की भी मांग की है। उनका दावा है कि इन बलों में इसी तरह भर्ती हुए सब-इंस्पेक्टर उच्च राजपत्रित अधिकारियों की रैंक तक पहुंचे हैं और एसएससी की एक ही संयुक्त परीक्षा के जरिये सेवा में आने के बावजूद उनका करियर रुका हुआ है।

32 वर्षों से सेवारत एक इंस्पेक्टर ने कहा, \“\“यह हमारे लिए लंबी लड़ाई रही है। सुप्रीम कोर्ट ने हमारी दलीलों में दम पाया और माना कि सही प्रोन्नति नहीं मिलने की वजह से हम अपने करियर में रुके हुए हैं। उम्मीद है कि इस बार हमारे साथ सही बर्ताव होगा और इसीलिए हमने अपने मुख्यालय से न्याय की अपील की है।\“\“
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