DELHI HC (9)
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। हत्या जैसे संगीन मामले में एक आरोपित को पुलिस की लापरवाही के कारण दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया। अदालत ने जमानत देते हुए रिकार्ड पर लिया कि जांच अधिकारी और संबंधित एसएचओ ने ही मामले में पेश होने की परवाह नहीं की।
अदालत ने इसके साथ ही यह भी टिप्पणी की कि सुनवाई के दौरान एक इंस्पेक्टर पेश हुआ था, लेकिन वह सिर्फ पन्ने पलट रहा था और उसने सुनवाई शुरू होने तक अभियोज को जानकारी भी नहीं दी।
साथ ही, न्यायमूर्ति गिरीश कथपालिया की पीठ ने पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने लिए कदम उठाने का निर्देश दिया कि जमानत के मामलों में सुनवाई शुरू होने से पहले जांच अधिकारी अभियाेजक को पूरी जानकारी उपलब्ध कराएं। पीठ ने यह भी कहा कि जांच अधिकारियों को सुनवाई के दौरान पूरी जांच फाइल के साथ मौजूद रहना चाहिए।
पीठ ने कहा कि इससे पहले भी सभी अभियोजकों को यह साफ कर दिया गया था कि अलग-अलग पीठ से स्थानांतरित होकर 179 पुराने जमानत के मामलों को नए सिरे से सौंपे जाने को देखते हुए अभियोजकों तैयार रहना चाहिए। मगर पूर्व आदेश का कोई फायदा नहीं हुआ।
यहां तक कि आरोपित आवेदक का वकील भी पेश नहीं हुआ और इस तरह के जमानत के मामलों को आगे टालना सही नहीं होगा।
अदालत ने नोट किया कि सह-आरोपित की मदद से मृतक की गला घोंटकर हत्या करने का आरोपित 22 जुलाई 2018 से न्यायिक हिरासत में था। अदालत ने यह भी नाेट किया कि कबूलनामे के अलावा जांच अधिकारी आरोपित के खिलाफ कोई सुबूत इकट्ठा नहीं किया था। अदालत ने कहा कि पुलिस ने आरोपित की जमानत याचिका का विरोध करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।
उक्त तथ्यों को देखते हुए अदालत ने कहा कि इस आदेश की प्रति पुलिस आयुक्त को भेजी जाए, ताकि जमानत के मामलों में कुछ सुधार के लिए कदम उठाए जा सकें और यह पक्का हो सके कि जांच अधिकारी सुनवाई शुरू होने से पहले अभियोजकों को ब्रीफ करें और वे सुनवाई के दौरान जांच से संबंधी फाइल के साथ मौजूद रहें।
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