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ऋषिकेश भूमि स्टांप घोटाला: सब-रजिस्ट्रार निलंबित, इस तरह दिया गया घोटाले को अंजाम

deltin33 2 hour(s) ago views 759
  

ऋषिकेश में औद्योगिक भूमि को आवासीय दर्शाकर कराई गई थीं रजिस्ट्रियां. Concept



जागरण संवाददाता, देहरादून। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो-टालरेंस नीति के अंतर्गत ऋषिकेश में करोड़ों रुपये के भूमि स्टांप घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने सब-रजिस्ट्रार ऋषिकेश हरीश कुमार को निलंबित कर दिया है।

औद्योगिक भूमि की श्रेणी बदलकर, फर्जी कागजात बनाकर एवं नियमों की धज्जियां उड़ाकर आवासीय श्रेणी में जमीनों की रजिस्ट्रियां कराकर राज्य सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व की चपत लगाने का मामला पिछले दिनों उजागर हुआ था। जिस पर जिलाधिकारी सविन बंसल ने सब-रजिस्ट्रार ऋषिकेश के निलंबन की संस्तुति शासन से की थी।

ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जिलाधिकारी सविन बंसल की 28 जनवरी को औचक छापेमारी में भारी अनियमितता सामने आने आई थी। जिस पर जिलाधिकारी ने उप-जिलाधिकारी डोईवाला की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। \“दैनिक जागरण\“ ने दो फरवरी के अंक में जांच में सामने आए इस घोटाले का राजफाश किया था।

जांच रिपोर्ट के अनुसार डोईवाला तहसील के ग्राम माजरी ग्रांट के जो खसरा नंबर दून घाटी विशेष विकास क्षेत्र महायोजना-2031 के तहत औद्योगिक उपयोग के लिए चिह्नित थे, उन्हें सुनियोजित ढंग से आवासीय दर्शाकर छोटे-छोटे प्लाटों के रूप में बेचा गया।

जांच अधिकारियों ने मौके पर लिए गए गूगल भू-कार्डिनेट्स व राजस्व अभिलेखों में दर्शाए गए मूल कार्डिनेट्स की तुलना की तो दोनों में भारी अंतर मिला। इस दौरान समिति ने ऋषिकेश में वर्ष 2025 में कराई गई 100 रजिस्ट्रियों की जांच की तो इनमें 55 रजिस्ट्रियां अवैध, अपूर्ण या संदिग्ध मिलीं। कई मामलों में बिना स्टांप शुल्क जमा व भूमि श्रेणी सत्यापन किए व बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के सीधे रजिस्ट्रेशन किए गए।

इस तरह दिया गया घोटाले को अंजाम
डोईवाला तहसील क्षेत्र के देहरादून-हरिद्वार रोड पर माजरी ग्रांट में जिस औद्योगिक भूमि खतौनी संख्या-921 की रजिस्ट्रियों में करोड़ों रुपये की स्टांप चोरी की गई, वह शीला स्पिन टैक्स प्राइवेट लिमिटेड सूरजमल विहार शाहरदरा (दिल्ली) के नाम पर आवंटित थी। इस कंपनी के निदेशक नितिन गर्ग, प्रबंधक सुभाष गर्ग, मनीष गर्ग व सुनील कुमार की ओर से ये सभी रजिस्ट्रियां अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर कराई गई।

जांच में सामने आया कि पूरी जमीन को 55 अलग-अलग छोटे भूखंड में बांटकर बेचा गया, ताकि मामला पकड़ में न आ सके। अनियतिमता पर जिलाधिकारी ने उप-जिलाधिकारी डोईवाला की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की। इस पर राजस्व व एमडीडीए की संयुक्त टीम ने मौके पर भूमि की जांच की। जिसमें भूमि औद्योगिक होने का पता चला।

फर्जी कर्मचारी लेता था उंगलियों के निशान
ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय की स्थिति यह है कि सब-रजिस्ट्रार डयूटी से गायब रहते थे और जीतिन पंवार नाम का एक फर्जी कर्मचारी क्रेता-विक्रेता के अंगूठे व उंगलियों के निशान लेता था। जांच में पता चला कि यह व्यक्ति सब-रजिस्ट्रार का परिचित था। जांच के दौरान पुराने दस्तावेज कूड़ेदान में फेंककर यह दिखाया गया कि कार्यालय में ‘सफाई’ चल रही है, जबकि जांच टीम के अनुसार यह सबूत मिटाने का प्रयास था।

घोर लापरवाही, नियोजित भ्रष्टाचार
जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा था कि ऋषिकेश सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में \“घोर लापरवाही, भ्रष्टाचार और नियोजित मिलीभगत\“ के ठोस प्रमाण मिले हैं। जांच टीम ने दोषियों पर कड़ी कार्रवाई, संदिग्ध रजिस्ट्रेशनों के निरस्तीकरण की प्रक्रिया व आर्थिक अपराध में मुकदमा दर्ज करने तक की सिफारिश की थी।

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