रठौंडा स्थित शिव मंदिर में आरती करते पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नक़वी साथ में राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी एवं पूर्व विधायक ज्वाला प्रसाद गंगवार। जागरण
जागरण संवाददाता, रामपुर। राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम को अनिवार्य किए जाने के सरकार के निर्णय पर चल रहे विवाद पर पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि स्वतंत्रा के महानायकों के शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रवाद के जुनून-जज़्बे से भरपूर वंदेमातरम से जिसके ईमान को खतरा हो, वह राष्ट्रवाद के प्रति ईमानदार नहीं हो सकता। वंदेमातरम मात्र गीत नहीं राष्ट्रवाद की आत्मा है। राष्ट्रवादी की आत्मा के खिलाफ आपराधिक अराजकता की आत्मघाती सनक सफल नहीं होगी।
मादरे वतन की शान में गीत से अगर किसी का ईमान खतरे में आ जाता है तो वो बेईमान है। नकवी शनिवार को मिलक तहसील के रठौंडा किसान मेले के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। महाशिवरात्रि पर एक माह तक चलने वाले रठौंडा के ऐतिहासिक मेले का पूर्व केंद्रीय मंत्री ने फीता काटकर उद्घाटन किया। उन्होंने रठौंडा शिव मंदिर में जलाभिषेक भी किया।
उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई के समय मुस्लिम लीग ने वंदेमातरम का विरोध कर विभाजन की विभीषिका का विष बोया था, जिसने भारत के टुकड़े किए। अब ऐसी विभाजनकारी मानसिकता से भरपूर सांप्रदायिक संक्रमण से समाज को सावधान रहना होगा। उन्होंने कहा कि सनातन का संस्कार ही पंथ निरपेक्षता का उपहार है।
यदि भारत में बहुसंख्यक सनातन आस्था नहीं होती तो, धर्मनिरपेक्षता के ध्वज पर भी सांप्रदायिकता का धावा बोल दिया जाता। वंदेमातरम के संस्कार, संकल्प, सोच ने भारत को संवैधानिक पंथनिरपेक्षता का सिकंदर और लोकतंत्र का धुरंधर बनाया है। जहां सत्ता बुलेट से नहीं बैलट से तय होती है।
नकवी ने कहा कि विभाजन की विभीषिका के बाद भारतीय संविधान और पाकिस्तानी संविधान लगभग एक समय बने। भारतीय संविधान सनातनियों और 145 करोड़ हिंदुस्तानियों के साये में सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि इस्लामी देश पाकिस्तान का संविधान टेररिज्म की टकसाल और ट्रेटरी का बंधक बन गया है।
इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष मोहनलाल सैनी, पूर्व विधायक ज्वाला प्रसाद गंगवार, अभय गुप्ता, राकेश मिश्रा, ब्लाक प्रमुख अर्चना गंगवार, कुलवंत औलख, टेक चंद्र गंगवार, जागेश्वर दयाल दीक्षित, महा सिंह राजपूत, भागीरथ सिंह गंगवार, चंद्र प्रकाश शर्मा, रजनीश पटेल, मिथिलेश सिंह, महेंद्र लोधी, ओमप्रकाश लोधी, अजय बाबू गंगवार, सोनू लोधी, शुभांक गंगवार, शंकर लाल गंगवार आदि उपस्थित रहे।
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