मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिलेगी दो लाख की सहायता राशि। सांकेतिक तस्वीर
राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्यमंत्री रोजगार सहायता योजना के तहत अब महिलाओं को सरकार से दो लाख रुपये की सहायता राशि लेने के लिए कई मानकों को पूरा करना होगा।
ग्रामीण विकास विभाग ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाकर सभी जिलों को सूचित कर दिया है। महिलाओं को यह राशि एक साथ नहीं, बल्कि चार चरणों में दी जाएगी। प्रत्येक चरण में सहायता राशि के साथ महिलाओं को अपनी ओर से अंशदान करना अनिवार्य होगा।
सहायता राशि की प्रक्रिया
पहली किस्त: 10,000 रुपये, जिसके बाद शुरू किए गए रोजगार का मूल्यांकन ग्राम स्तर पर किया जाएगा।
जिला स्तरीय कमेटी इस मूल्यांकन की जांच करेगी और राज्य स्तरीय कमेटी से अनुशंसा की जाएगी।
अगली किस्त के लिए अब तक 19 लाख महिलाओं ने आवेदन किया है।
अंशदान अनिवार्य
पहली किस्त में 20,000 रुपये मिलने पर उद्यमी महिला को अतिरिक्त 5,000 रुपये का अंशदान करना होगा।
योजना के पहले चरण में 1.56 करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है।
राशि देने की अवधि
मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत छह माह पूरे होने के बाद अगली किस्त दी जाएगी।
अगले चरण में राशि देने के लिए चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
चार चरणों में राशि वितरण
चरण सहायता राशि स्वयं का अंशदान
पहला
20,000 रुपये
5,000 रुपये
दूसरा
40,000 रुपये
10,000 रुपये
तीसरा
80,000 रुपये
20,000 रुपये
चौथा
60,000 रुपये
मार्केटिंग एवं ब्रांडिंग में योगदान
विशेष प्रावधान:
यदि चार-पांच महिलाएं मिलकर कोई व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं, तो उन्हें प्रति महिला 20,000 रुपये की हिसाब से एकमुश्त राशि दी जा सकती है।
जिन महिलाओं ने बेहतर तरीके से व्यवसाय शुरू किया है और उन्हें अधिक पूंजी की आवश्यकता है, उन्हें भी प्रदेश स्तर पर निर्णय के बाद एकमुश्त राशि दी जा सकती है।
चयन प्रक्रिया और जिम्मेदारियां
महिलाओं ने ग्राम संगठन के माध्यम से योजना के फार्म भरे थे।
ग्राम संगठन तय करेगा कि कौन सी महिला निर्धारित मानकों पर खरी उतरी है।
महिलाओं को जीविका समूह या स्वयं सहायता समूह की बैठकों में नियमित भाग लेना होगा।
प्रमुख शर्तें
समूह की बैठक में नियमित भाग लेना।
समूह में हर हफ्ते 10 रुपये का अपना योगदान जारी रखना।
समूह में बचत के नियम का पालन करना।
अपना व्यवसाय तैयार करना।
अलग-अलग मॉडल की प्रशिक्षण में हिस्सा लेना।
अपने आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा तैयार रखना।
हर महीने छोटी-सी भी सही, लेकिन एपडी या आरडी करना।
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