प्राइवेट अस्पतालों में भी अनिवार्य होगी एंटी रेबीज वैक्सीन।
जागरण संवाददाता, महराजगंज। जिले में कुत्ता, बंदर व अन्य जानवरों के काटने की बढ़ती घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब जिले के सभी निजी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) और इम्युनोग्लोबुलिन सीरम रखना अनिवार्य होगा। निजी अस्पताल जिस प्रकार अपने दवाओं की खरीद करती हैं, उसी प्रकार उन्हें एंटी रेबीज वैक्सीन की भी खरीदारी करनी होगी।
निर्देशों के अनुसार, पशु के काटने पर निजी अस्पताल पहुंचने वाले रोगी को तत्काल प्राथमिक उपचार देने के साथ एंटी रेबीज वैक्सीन की पहली डोज मौके पर ही लगानी होगी। पहली डोज देने में किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
पहली खुराक देने के बाद आगे की डोज के लिए मरीज को सरकारी अस्पताल अथवा उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी रोगी शुरुआती उपचार से वंचित न रहे।
अक्सर देखा जाता है कि निजी अस्पतालों में वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण रोगियों को इधर-उधर भटकना पड़ता है, जिससे उपचार में देरी हो जाती है।
रेबीज एक घातक वायरल संक्रमण है, जिसमें लक्षण प्रकट होने के बाद उपचार संभव नहीं होता और अधिकांश मामलों में मृत्यु हो स्वास्थ्य विभाग का मानना है, कि इस नई व्यवस्था से रेबीज से होने वाली मृत्यु पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा। यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में लागू किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवनाथ प्रसाद ने बताया कि सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की सुविधा उपलब्ध है। महराजगंज जिले में कुल 115 निजी अस्पताल संचालित हैं। शासन के निर्देशानुसार अब सभी अस्पतालों को एआरवी और इम्युनोग्लोबुलिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस निर्णय के कई महत्वपूर्ण फायदे हैं। सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पशु काटने के बाद उपचार में देरी नहीं होगी। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के रोगियों को तत्काल पहली खुराक मिल सकेगी, जिससे संक्रमण का खतरा काफी कम हो जाएगा। साथ ही निजी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
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