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वैश्विक व्यवस्था में मित्र-शत्रु की पहचान कठिन, भारत को स्वतंत्र रहना होगा- सीडीएस अनिल चौहान

Chikheang 2 hour(s) ago views 86
  

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान। (पीटीआई)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में स्थायी मित्र या शत्रु के बारे में धारणाएं तेजी से अविश्वसनीय होती जा रही हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए मानसिक, संरचनात्मक और भौतिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

रणनीतिक स्वायत्तता की आवश्यकता पर जोर देते हुए चौहान ने कहा कि राष्ट्रीय हित के अनुरूप साझेदारी मूल्यवान होती है, लेकिन वे स्वदेशी क्षमता या चुनाव की स्वतंत्रता के विकल्प के रूप में काम नहीं कर सकतीं। वे यहां दक्षिणी कमान द्वारा आयोजित \“जेएआइ\“ (संयुक्तता, आत्मनिर्भर नवाचार) संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “आज की दुनिया में यह परिभाषित करना मुश्किल है कि आपके मित्र कौन हैं, सहयोगी कौन हैं, शत्रु कौन हैं और प्रतिद्वंद्वी कौन हैं। रणनीतिक गठबंधन अस्थिर और लेन-देन पर आधारित हो गए हैं।\“\“

उन्होंने बताया कि वैश्विक सुरक्षा वातावरण अनिश्चितता और अस्थिरता से भरे नाटकीय परिवर्तनों से गुजर रहा है। उन्होंने आक्रामक राष्ट्रवाद और आर्थिक हथियारों के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र किया, जहां व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाएं, प्रौद्योगिकी तक पहुंच और महत्वपूर्ण संसाधन रणनीतिक लाभ के उपकरण के रूप में तेजी से उपयोग किए जा रहे हैं।

सीडीएस ने कहा, \“\“घोषित युद्ध अप्रचलित होते जा रहे हैं। प्रतिस्पर्धा तेजी से परोक्ष अभियानों, गुप्त अभियानों और साइबर गतिविधियों के माध्यम से प्रकट हो रही है।\“\“ उन्होंने कहा कि छद्म और सूचनात्मक युद्ध एक केंद्रीय युद्धक्षेत्र के रूप में उभरा है, जो सशस्त्र बलों के बजाय समाजों को निशाना बना रहा है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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