राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधानमंडल के बजट सत्र के चौथे दिन गुरुवार को विधान सभा में स्टेडियम, खेल के मैदान की दुर्दशा व खेल बजट कम होने का मुद्दा उठाया। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चुहलबाजी भी देखने को मिली। खेल को लेकर शुरू हुई बहस देखते ही देखते ‘मैच’ खेलने की चुनौती में बदल गई। इस दौरान सदन ठहाकों से गूंज उठा। विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी मौके पर चुटकी लेते हुए माहौल को हल्का कर दिया।
दरअसल, सपा सदस्य सचिन यादव ने खेल विभाग में कम बजट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त प्रविधान नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं और संसाधनों के अभाव खिलाड़ियों के सामने बड़ी चुनौती बन रहे हैं।
इस दौरान सपा के ही कमाल अख्तर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मंत्री बनाते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वह संबंधित क्षेत्र का अनुभवी हो। खासकर खेल मंत्री ऐसा होना चाहिए जो खुद खिलाड़ी रहा हो। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अपने मंत्री तो ऐसे हैं जिन्होंने कभी गुल्ली-डंडा तक नहीं खेला है।
खेल मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने विपक्ष के तंज पर कहा कि वे स्वयं खिलाड़ी रहे हैं और हाकी, बैडमिंटन तथा कबड्डी जैसे खेल खेलते रहे हैं। कोई भी खेल में मैच खेल लीजिए। इस पर कमाल अख्तर ने मुस्कराते हुए कहा, “तो फिर ठीक है, हमारे और आपके बीच क्रिकेट हो जाए।” पीछे से आवाज आई “अरे नहीं भाई, कबड्डी हो जाए!”
संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा मंत्री जी कुश्ती के खिलाड़ी हैं एक दिन आप दोनों की कुश्ती करवाई जाएगी। अध्यक्ष सतीश महाना ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा कि कुश्ती सदन में नहीं बाहर करवाइयेगा। इतना सुनते ही दोनों पक्षों में ठहाके गूंज उठे।
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