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फर्जी साइनबोर्ड, गांधी और अंबेडकर की तस्वीरें... कंबोडिया से भारतीयों को धोखा देने का था प्लान; चीन का भी लिंक

deltin33 1 hour(s) ago views 917
  

पिछले कुछ हफ्तों में कंबोडिया की सरकार ने वैश्विक स्तर पर चलने वाले इन फ्रॉड हब्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कंबोडिया में भारतीयों को \“डिजिटल गिरफ्तारी\“ के जाल में फंसाने वाले स्कैमर्स का पर्दाफाश हो गया है। मुंबई पुलिस और सीबीआई के लोगो वाले फर्जी साइनबोर्ड, गांधी-अंबेडकर की तस्वीरें और भारतीय झंडा लगाकर धोखाधड़ी का बड़ा खेल चल रहा था।

एक चीनी मूल के टायकून को इस घोटाले का सरगना माना जा रहा है, और अब कंबोडिया की पुलिस ने ऐसे सैकड़ों सेंटरों पर ताला जड़ दिया है। यह खुलासा तब हुआ जब फ्नॉम पेन्ह की पुलिस ने एक खाली पड़े कंपाउंड की तलाशी ली। यहां स्कैमर्स भारतीयों को ठगने के लिए \“डिजिटल अरेस्ट\“ का तरीका अपनाते थे। अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक चीन में जन्मा बड़ा कारोबारी है, जो अब गिरफ्त में है।
स्कैम सेंटरों पर बड़ी कार्रवाई

पिछले कुछ हफ्तों में कंबोडिया की सरकार ने वैश्विक स्तर पर चलने वाले इन फ्रॉड हब्स के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। लगभग 200 ऐसे सेंटरों को बंद कर दिया गया है। कंबोडिया की ऑनलाइन स्कैम्स से लड़ने वाली कमिशन के चेयरमैन और सीनियर मंत्री छाय सिनारिथ ने रॉयटर्स को बताया, “हमने अब तक करीब 190 जगहों को सील कर दिया है।“

यह अभियान पिछले साल के अंत में शुरू हुआ, जब अमेरिका ने चीन में जन्मे कथित स्कैम किंगपिन ली कुओंग को आरोपी बनाया और चीन ने उसे प्रत्यर्पित किया। इस कार्रवाई में 173 बड़े अपराधी गिरफ्तार हुए हैं और 11,000 वर्कर्स को उनके देश वापस भेजा गया है। यह अब तक का सबसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय कदम माना जा रहा है।
कैंपोट प्रांत में क्या मिला?

रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने एक सेंटर से दुर्लभ तस्वीरें शेयर कीं, जो दिखाती हैं कि स्कैमर्स कितनी चालाकी से काम करते थे। वियतनाम बॉर्डर के पास कैंपोट प्रांत के इस बड़े कॉम्प्लेक्स में फर्जी साइनबोर्ड, भारतीय झंडा और गांधी-अंबेडकर की फोटो का इस्तेमाल भारतीयों को ठगने के लिए किया जाता था।

ये स्कैमर्स दुनिया भर के लोगों को निशाना बनाते थे। पुलिस का कहना है कि हजारों वर्कर्स, जिनमें से कुछ ट्रैफिकिंग के शिकार थे और बुरी हालत में कैद थे, हाल के हफ्तों में इन कंपाउंड्स से भाग गए। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे \“मानवीय संकट\“ बताया है।

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