कैप्शन: प्राचीन शिव मंदिर बिश्नाह के महामंडलेश्वर अनूप गिरि महाराज ने बताई शिवरात्रि की तिथि (फाइल फोटो)
संवाद सहयोगी, बिश्नाह। प्राचीन शिव मंदिर बिश्नाह के महामंडलेश्वर अनूप गिरि महाराज ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश और नंदी देव का पूजन करना चाहिए। रात्रि के समय पूजा किसी विद्वान पंडित के सानिध्य में करनी चाहिए। शिवरात्रि अर्थात शिव जी की रात्रि। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस तिथि की रात्रि को भगवान शिव का विवाह माता पार्वती जी से हुआ था।
शिव जी की पूजा में रुद्राक्ष अवश्य धारण करना और भस्म लगानी चाहिए। सिले हुए वस्त्र की जगह धोती पहननी चाहिए और कंधे पर गमछा धारण करना चाहिए। शिव जी को अपने भोग में हुई देरी सहन नहीं होती है। इसलिए, शिव जी की आरती करने के तुरंत बाद उन्हें भोग लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि महाशविरात्रि का पर्व देश सहित प्रदेश भर में धूमधाम से मनाया जाता है। इसका लोग काफी इंतजार करते हैं।
भोलेनाथ अपने भक्तों पर शीघ्र होते हैं प्रसन्न
भगवान शिव को औघड़दानी कहा जाता है। वह अपने भक्तों पर अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं और उन्हें उनकी इच्छानुसार वरदान प्रदान करते हैं। वह वरदान देते समय यह नहीं सोचते हैं कि उनके इस वरदान से सृष्टि में कोई उथल-पुथल हो सकती है या सृष्टि का कोई नियम भंग हो सकता है। जिस पर भी प्रसन्न हुए उसे मनचाहा वरदान दे दिया। इसलिए, उन्हें औघड़दानी कहा जाता है।
पारद का शिवलिंग स्वयं होता है सिद्ध
पारद (पारा) की उत्पत्ति शिव जी के वीर्य से हुई मानी जाती है। इसलिए, पारद के शिवलिंग को साक्षात शिव स्वरूप मान्यता प्रदान की गई है। पारद का शिवलिंग स्वयं सिद्ध होता है। नियमित पारद के शिवलिंग की पूजा करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं स्वतः ही पूर्ण होती हैं। उसे सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा मन को शांति भी मिलती है। |