उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा
राज्य ब्यूरो, पटना। उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गुरुवार को विधानसभा में विभाग की लंबित फाइलों की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि विभाग के पास कुल 46 लाख आवेदन लंबित हैं। इनमें से अकेले 40 लाख आवेदन परिमार्जन से संबंधित हैं। यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान दी गई। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में आवेदन नाम और पिता के नाम की त्रुटियों से जुड़े हैं। तकनीकी और अभिलेखीय गड़बड़ियां प्रक्रिया में देरी का कारण बन रही हैं।
असर्वेक्षित भूमि पर विधायक ने उठाया सवाल
बरौली विधायक मंजीत कुमार सिंह ने असर्वेक्षित भूमि का मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि सितंबर 2024 में पटना उच्च न्यायालय ने असर्वेक्षित जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा ली थी।
इसके बावजूद कई जिलों में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया नहीं हो पा रही है। उन्होंने अररिया, अरवल, बांका, बेगूसराय, जमुई और जहानाबाद समेत कई जिलों का उल्लेख किया।
कटिहार, खगड़िया, किशनगंज, लखीसराय और मधेपुरा में भी यही स्थिति है। सारण, सिवान और गोपालगंज सहित अन्य जिलों में भी लोग परेशान हैं।
खाता-खेसरा नहीं होने से बढ़ी दिक्कत
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि असर्वेक्षित भूमि का खाता-खेसरा निर्धारित नहीं होने के कारण दाखिल-खारिज में परेशानी आ रही है। भूमि अभिलेखों के अभाव में स्वामित्व सत्यापन जटिल हो जाता है।
इसी वजह से आवेदन लंबित रह जाते हैं। सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाए हैं। 29 अक्टूबर 2024 को सभी बंदोबस्त पदाधिकारियों को सर्वे का निर्देश जारी किया गया है। सर्वे प्रक्रिया तेज कर विवादों को कम करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार ने संवेदनशीलता जताई
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विषय में महाधिवक्ता से भी परामर्श किया गया है। सरकार जमीन विवादों से मुक्ति के लिए गंभीर और संवेदनशील है। परिमार्जन से जुड़े आवेदनों के निष्पादन में तेजी लाने का प्रयास हो रहा है।
तकनीकी त्रुटियों को सुधारने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पहल की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि लंबित मामलों के समाधान की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी। सरकार का लक्ष्य है कि भूमि से जुड़े विवादों को कम कर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। |