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बीआर मणि ने जमीन खोदकर निकाला था राम जन्मभूमि मंदिर का सच, अब भारत सरकार ने पद्मश्री देने का किया एलान

LHC0088 1 hour(s) ago views 996
  

प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. बीआर मणि को पद्मश्री दिए जाने की घोषणा।



वी के शुक्ला, नई दिल्ली। जिन प्रख्यात पुरातत्वविद डॉ. बीआर मणि को पद्मश्री दिए जाने की घोषणा की गई है, यह पुरस्कार उनके उस काम को मिला है जिस काम ने हिन्दुओं की आस्था का केंद्र अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर का पुरातात्विक सच जमीन से खोद कर निकाला था।

उन्हें सम्मानित किया जाना केवल एक व्यक्ति को मिला सम्मान नहीं, बल्कि उस वैज्ञानिक प्रक्रिया की सार्वजनिक स्वीकृति है, जिसने दशकों से चले आ रहे इस राम जन्मभूमि विवाद को पुरातात्विक साक्ष्यों की ठोस जमीन पर ला खड़ा किया। डॉ. मणि ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर वर्ष 2003 में राम जन्मभूमि परिसर में हुई खाेदाई का नेतृत्व किया और विवाद के केंद्र में रही भूमि के नीचे छिपे ऐतिहासिक प्रमाणों को सामने रखा।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की इस खुदाई की जिम्मेदारी उस समय एएसआई के इन वरिष्ठ अधिकारी और अनुभवी पुरातत्वविद डॉ. मणि के कंधों पर थी। खोदाई न्यायालय की निगरानी में नियंत्रित वैज्ञानिक पद्धति से और कई स्तरों पर कराई गई। यह कोई आस्था आधारित अभ्यास नहीं था, बल्कि अदालत के निर्देशों के अनुसार की गई सुनियोजित पुरातात्विक जांच थी, जिसमें हर चरण का दस्तावेज़ीकरण किया गया।
साक्ष्य ने स्पष्ट किया कि यहां विशाल हिंदू धार्मिक संरचना थी मौजूद

कई महीनों तक चली खोदाई में स्तंभों के आधार प्राचीन दीवारों और फर्श के अवशेष, स्थापत्य संरचनाओं के संकेत, मूर्तिकला से जुड़े खंड और धार्मिक परिसर के चिन्ह सामने आए। इन साक्ष्यों ने यह स्पष्ट किया कि स्थल पर इस्लामिक काल से पहले एक विशाल हिंदू धार्मिक संरचना मौजूद थी, जिसके अवशेष बाद की परतों के नीचे दबे हुए थे। एएसआइ की यह रिपोर्ट आगे चलकर न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार बनी।

अपने लंबे करियर में बी आर मणि ने एएसआइ में विभिन्न अहम जिम्मेदारियां निभाईं, लेकिन राम जन्मभूमि की अदालत-आदेशित खोदाई उनके जीवन का वह अध्याय बनी, जिसने उन्हें इतिहास के निर्णायक मोड़ से जोड़ दिया। पद्मश्री सम्मान के साथ आज उन्हें उस भूमिका के लिए भी याद किया जा रहा है।

हालांकि दिल्ली में पूर्व में हुईं राजा अनंगपाल तोमर के लालकोट से संबंधित दस्तावेज जुटाने की बात हो इस मामलें में भी डा मणि की अहम भूमिका रही है। डा मणि ने राजा अनंगपाल का ताल और उनका किला लालकोट 1993 से लेकर 1995 तक महरौली में खोदाई कर ढूंढ निकाला था।
कपिलवस्तु, राजघाट और सारनाथ में उत्खनन कार्य का किया नेतृत्व

डॉ. मणि राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली के पहले ऐसे महानिदेशक रहे हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान प्रारंभिक हड़प्पा स्थल कुणाल (हरियाणा) में उत्खनन कार्य का प्रत्यक्ष निर्देशन किया। वर्ष 2013–15 के दौरान उन्होंने कपिलवस्तु, राजघाट और सारनाथ (उत्तर प्रदेश) में पुनः उत्खनन कार्य का नेतृत्व किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद में स्थित पीजीडब्ल्यू स्थल कुर्डी में वर्ष 2024–25 से उत्खनन कार्य से जुड़े हुए हैं।

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