पंखा रोड से पालम की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग के किनारे बना करीब 14 फीट गहरा नाला।
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। बीते दिनों नोएडा के सेक्टर-150 में सुरक्षा बैरिकेडिंग की कमी के कारण एक युवक की कार समेत डूबने से हुई दर्दनाक मौत की घटना, दिल्ली के पालम-डाबरी मार्ग पर भी दोहराई जा सकती है। पंखा रोड से पालम की ओर जाने वाले इस मुख्य मार्ग के किनारे बना करीब 14 फीट गहरा नाला कई स्थानों पर पूरी तरह असुरक्षित है। जिस तरह नोएडा में सावधानी के अभाव ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान ले ली, उसी प्रकार यहां भी सुरक्षा दीवार या बैरिकेडिंग का न होना किसी बड़ी अनहोनी को दावत दे रहा है।
पालम, राजनगर, महावीर एन्क्लेव और दशरथपुरी जैसे इलाकों का जलभराव ढोने वाला यह नाला काफी पुराना और गहरा है। इसकी गहराई इतनी है कि इसमें एक छोटी कार पूरी तरह समा सकती है। बावजूद इसके, सड़क की ओर से कई स्थानों पर नाले का बड़ा हिस्सा बिना किसी सुरक्षा घेरे के खुला पड़ा है।
यहां न तो कोई चेतावनी बोर्ड है और रात के समय न ही रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था, जो रात के समय वाहन चालकों के लिए स्थिति को और भी घातक बना देती है। यह खुला स्थान इतना बड़ा है कि कारें ही नहीं ट्रक भी इसे पास कर सकते हैं। वहीं नाले की गहराई 14 फीट के साथ ही चौड़ाई भी लगभग उतनी ही है। जिसमें बाइक सवार तो बहुत छोटे हैं एक कार भी इसमें डूब सकती है।
करीब दो किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर बड़े स्कूल, छोटे माल और कई शोरूम खुल चुके हैं। इन संस्थानों ने अपने ठीक सामने के नाले को तो ढक लिया है, लेकिन इनके बीच का लंबा हिस्सा अब भी असुरक्षित है। मुख्य मार्ग होने के कारण यहां वाहनों का भारी दबाव रहता है, जिससे किनारे से गुजरने वाले वाहनों के नाले में गिरने का खतरा बना रहता है।
अनहोनी से पहले जागने की ज़रूरत
नोएडा में युवराज मेहता की मौत ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्माण स्थलों या नालों के किनारे बैरिकेडिंग की कमी कितनी महंगी पड़ सकती है। पालम-डाबरी मार्ग की वर्तमान स्थिति भी कुछ वैसी ही है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि किसी भी हादसे का इंतज़ार किए बिना, संबंधित विभाग को तुरंत पूरे मार्ग पर सुरक्षा रेलिंग या कंक्रीट की दीवार बनानी चाहिए।
नोएडा वाली घटना को देखकर डर लगता है। यहां नाले के किनारे सड़क पर चलना जान जोखिम में डालने जैसा है, क्योंकि सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। - रमेश कुमार, स्थानीय निवासी
यह नाला इतना गहरा है कि हादसा होने पर कार को ढूंढना भी मुश्किल होगा। बाइक तो बहुत छोटी है। प्रशासन को तुरंत यहां मजबूत बैरिकेडिंग लगानी चाहिए। - सुमित सिंह, राहगीर
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