search
 Forgot password?
 Register now
search

दिल्ली की अदालत ने मेधा पाटकर को किया बरी, LG वीके सक्सेना ने 20 साल पहले दायर किया था मानहानि का केस

Chikheang Yesterday 23:26 views 195
  

मानहानि मामले में मेधा पाटकर बरी।



जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। साकेत कोर्ट ने दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से दायर दो दशक पुराने आपराधिक मानहानि मामले में नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर को बरी कर दिया है। साकेत कोर्ट के फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट राघव शर्मा ने शनिवार को सुनाए गए फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता आरोपित के खिलाफ अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहे। ऐसे में आरोपित मेधा पाटकर को आइपीसी की धारा-500 के तहत दंडनीय अपराध से बरी किया जाता है।

यह मामला 2006 का है। वीके सक्सेना उस समय नेशनल काउंसिल आफ सिविल लिबर्टीज (एनसीसीएल) के अध्यक्ष थे। उन्होंने 20 अप्रैल, 2006 को निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम के दौरान मानहानि का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने दावा किया कि मेधा पाटकर ने आन एयर उन पर सरदार सरोवर निगम से सिविल कान्ट्रैक्ट लेने का आरोप लगाया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
पाटकर को एक कानूनी नोटिस भेजा

उन्होंने इसे एक सीडी से साबित करने की पेशकश की। उन्होंने प्रसारण के तुरंत बाद पाटकर को एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें सीडी की एक प्रति और उनके दावों का सबूत मांगा गया था, पर कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने मानहानि का मामला दायर किया। हालांकि आपराधिक मामला अहमदाबाद की एक अदालत में शुरू किया गया था, पर 2010 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसे दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया।

अपने आदेश में जज ने कहा कि वीके सक्सेना ने पाटकर द्वारा दिए गए कथित मानहानिकारक बयानों वाले मूल फुटेज या उसे रिकार्ड करने वाले डिवाइस को पेश नहीं किया। इसलिए पाटकर द्वारा दिए गए बयान साबित नहीं हो सके।

कोर्ट ने कहा कि यह ध्यान देना जरूरी है कि जिस रिपोर्टर ने असल में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्ड किया था, उसे या किसी ऐसे व्यक्ति को जिसने आरोपित को विवादित बयान देते हुए देखा था, गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया है। यह भी ध्यान देना जरूरी है कि चैनल के कार्यक्रम में दिखाई गई क्लिप आरोपित के किसी इंटरव्यू या प्रेस कान्फ्रेंस का सिर्फ एक बहुत छोटा हिस्सा लगती है।
कोर्ट ने की अहम टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि कोई भी फैसला लेने के लिए यह जरूरी है कि प्रेस कान्फ्रेंस का पूरा वीडियो और ऑडियो कोर्ट के सामने लाया जाए या उस प्रेस कान्फ्रेंस का कोई चश्मदीद गवाह इसके बारे में गवाही दे। उस इंटरव्यू की पूरी क्लिप या फुटेज की जांच किए बिना, आरोपित के भाषण के बारे में कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।

इससे पहले पाटकर को वीके सक्सेना की ओर से दायर एक अलग मानहानि मामले में दोषी ठहराया गया था। ट्रायल कोर्ट का वह फैसला सुप्रीम कोर्ट तक बरकरार रहा था।

यह भी पढ़ें- दिल्ली में 102 दिन बाद सुधरी हवा की गुणवत्ता, AQI 200 से नीचे आया; बारिश और तेज हवा चलने से मिली राहत
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
157165

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com