आजम खां और जौहर विश्वविद्यालय
जागरण संवाददाता, रामपुर। दो पासपोर्ट बनवाने के जुर्म में बेटे अब्दुल्ला संग सात वर्ष की सजा काट रहे सपा नेता मोहम्मद आजम खां अब मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं या कोई और? इस सवाल पर जौहर विश्वविद्यालय प्रबंधन ने चुप्पी साध ली है। हालांकि कुलपति ने प्रेसवार्ता कर साजिशन विवि की छवि धूमिल करने का आरोप लगाते हुए विधिक कार्रवाई की बात कही। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2024 में ही आजम खां अपनी पत्नी व बेटे अब्दुल्ला समेत ट्रस्ट से अलग हो गए थे। जबकि, विश्वविद्यालय में आज भी वह चांसलर के पद पर बने हुए हैं।
शुक्रवार को जौहर विश्वविद्यालय के कुलपति जहीर उद्दीन ने प्रेस वार्ता करते हुए एक अखबार में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। इसी क्रम में मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से आजम खां के इस्तीफा देने की झूठी खबर प्रकाशित की गई।
पत्रकारों ने जब पूछा कि जौहर ट्रस्ट का अध्यक्ष कौन है, इसका उन्होंने यह कहकर जवाब नहीं दिया कि ये अंदरूनी मामला है। सवाल उठाया कि जेल से आजम इस्तीफा कैसे दे सकते हैं। कुलपति के सीधा जवाब न देने से संशय और गहरा गया कि अब आजम खां ट्रस्ट के अध्यक्ष नहीं हैं। साथ ही ट्रस्ट की सचिव पद से उनकी पत्नी तजीन फात्मा और सदस्य पद से छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम भी अलग हो गए हैं।
अगर ये अपने पद पर होते तो विश्वविद्यालय प्रबंधन को इसकी स्वीकारोक्ति से बिल्कुल गुरेज नहीं होती। खुफिया सूत्र बताते हैं कि अब्दुल्ला के फर्जी जन्म प्रमाणपत्र मामले में आजम खां समेत उनकी पत्नी और बेटे अब्दुल्ला को न्यायालय से सजा सुनाई जा चुकी है। ऐसे में ट्रस्ट के क्रियाकलापों में किसी तरह का व्यवधान न हो। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए ही संभवत: आजम खां समेत उनकी पत्नी व छोटे बेटे ने ट्रस्ट से अपना नाम हटा लिया।
आजम खां ने ट्रस्ट में अध्यक्ष पद पर अपनी बहन निकहत व सचिव पद पर बड़े बेटे अदीब आजम खां को काबिज करा दिया। हालांकि, प्रेस वार्ता के दौरान कुलपति ने इसे स्वीकार नहीं किया। इससे जौहर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को लेकर संशय खड़ा हो गया है। इस ट्रस्ट के तहत ही आजम खां के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन हो रहा है।
विश्वविद्यालय के चांसलर पद पर आजम बरकरार
जौहर ट्रस्ट के अध्यक्ष पद पर आजम खां के काबिज होने को लेकर भले ही संशय खड़ा हुआ हो मगर जेल में रहने के बावजूद जौहर विश्वविद्यालय का चांसलर पद वहीं संभाल रहे हैं। राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डा. दिनेश राजपूत ने फोन पर बताया कि बीती सात जनवरी को जौहर विश्वविद्यालय से भेजी गई रिपोर्ट में आजम खां ही चांसलर पद पर काबिज हैं।
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