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इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पीआरवी की सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है।
अरविंद मिश्रा, ग्रेटर नोएडा। हादसे के बाद सबसे तेज गति से मदद का दंभ भरने वाली गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस का दावा हवा हवाई साबित हुआ। घटना में सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाली पीआरवी (पुलिस रिस्पाॅन्स व्हीकल) की इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में सबसे बड़ी लापरवाही सामने आई है।
साॅफ्टवेयर इंजीनियर के बेसमेंट के लिए खाेदे गए प्लाॅट में भरे पानी में डूबने की सूचना कंट्रोल रूम से मिलने के बाद मौके पर नौ मिनट में दो पीआरपी पहुंची थीं, लेकिन उसके पास इंजीनियर को बचाने के लिए जरूरी संसाधन तक नहीं थे। पीआरवी का हादसे के दौरान घायलों की मदद के लिए जरूरी संसाधनों से हमेशा लैस रहना जरूरी है।
पीआरवी के जवान इंजीनियर की मदद के बजाए दमकल और एसडीआरएफ को फोन घुमाते रहे। घटना स्थल पर पीआरवी की लापरवाही एक माह पहले भी हुई थी। घटना स्थल पर हादसे की आशंका को देखते हुए एक पीआरवी को स्थाई तौर पर वहां तैनाती के निर्देश थे, लेकिन एक माह पहले जब वहां इसकी जांच की तो पीवीआर गैर मौजूद थी।
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कार्रवाई करते हुए पीआरपी पर तैनात जवानों का निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद लापरवाही की गई। दस दिन पूर्व ट्रक के हादसाग्रस्त होने के दौरान भी पीआरवी मौके से गायब थी।
गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश सरकार अपने विकास का चेहरा बनाती का देश दुनिया में प्रचार करती है। कानून व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं दावा कर ग्लोबल इंवेस्टर समिट में जिले में सबसे अधिक निवेश जुटाने में सरकार सफल रही। लेकिन युवराज की मौत से स्पष्ट हो गया कि यह दावे सिर्फ कागजी हैं। युवराज मेहता की मौत ने इन दावों की परतें उधेड़ दी हैं।
बेसमेंट के लिए खोदे गए प्लाॅट में भरे पानी में कार समेत डूबने के बाद रात 12:20 पर युवराज ने जैसे तैसे हिम्मत जुटाते हुए अपने पिता को फोन कर मदद मांगी थी। पिता ने 12:25 बजे पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देकर बेटे को बचाने की गुहार लगाई। 12:41 बजे कंट्रोल रूम ने थाना प्रभारी और पीआरवी को घटना की जानकारी देते हुए मदद के लिए पहुंचने को कहा।
नौ मिनट में दो पीआरवी मौके पर पहुंच गई, तब तक इंजीनियर को पानी के गिरे बीस मिनट से अधिक हो चुके थे। खुद को बचाने के लिए लगातार मदद का इंतजार कर रहा था। पीवीआर के पहुंचने के बाद मदद की जो उम्मीद जगी, वह कुछ ही सकेंड में टूट गई, जब पता चला की पीआरवी मौके पर महज औपचारिकता के लिए पहुंची है।
उसमें बचाव के कोई संसाधन तक नहीं है। मौके की स्थिति को देखते हुए इंजीनियर की मदद के बजाए पीआरवी के जवान खुद दमकल से मदद मंगाने के लिए फोन करने में लग गए। लेकिन उनके पास भी बचाव के संसाधन नहीं थे। बचाव के लिए अमला जुटने के बाद भी इंजीनियर की मौत को नहीं बचा पाया।
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