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चढ़ते पारे से खतरे की आहट! ग्लेशियर झीलों पर सख्त निगरानी, वाडिया संस्थान नोडल

LHC0088 2026-1-21 09:26:34 views 1240
  

उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों के वैज्ञानिक अध्ययन, जोखिम आकलन और सुरक्षात्मक उपायों पर करेगा काम। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर



राज्य ब्यूरो, देहरादून। वैश्विक तापक्रम में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव के साथ ही हिमालयी क्षेत्रों में आपदा की आशंका को देखते हुए सरकार ने राज्य में स्थित ग्लेशियर झीलों की निगरानी को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सभी संवेदनशील और अतिसंवेदनशील ग्लेशियर झीलों के वैज्ञानिक अध्ययन, जोखिम आकलन और सुरक्षात्मक उपायों की जिम्मेदारी अब वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को सौंपी गई है। शासन ने संस्थान को नोडल विभाग नामित करते हुए समन्वित और विशेषज्ञ आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में 968 ग्लेशियरों के अंतर्गत लगभग 1200 से अधिक छोटी-बड़ी ग्लेशियर झीलें चिह्नित की गई हैं। इनमें से पांच झीलों को अत्यधिक जोखिम की श्रेणी में रखा गया है। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने राज्य की 13 झीलों को संवेदनशील और अति संवेदनशील घोषित किया था। इसके बाद राज्य स्तर पर ग्लेशियर झीलों को लेकर ठोस कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता महसूस की गई।

राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने इससे पहले अत्यधिक जोखिम की श्रेणी में शामिल चमोली जिले की वसुधारा ग्लेशियर झील का अध्ययन विशेषज्ञों के माध्यम से कराया। इसके साथ ही पिथौरागढ़ जिले की चार अतिसंवेदनशील झीलों में से दो के अध्ययन की योजना बनाई गई थी, लेकिन वर्ष 2025 में मानसून के दौरान आपदा की स्थिति उत्पन्न होने के कारण यह कार्य स्थगित करना पड़ा। उच्च हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न खतरों को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसके लिए विशेष एजेंसी का चयन कर उसे नोडल बनाने के निर्देश दिए थे।

इस क्रम में शासन ने अब वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान को नोडल विभाग बनाया है। आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि वाडिया संस्थान अन्य केंद्रीय शोध संस्थानों के सहयोग से ग्लेशियर झीलों का विस्तृत सर्वेक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण करेगा। अध्ययन के आधार पर जोखिम न्यूनीकरण की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसमें झीलों में जलस्तर मापन यंत्र, चेतावनी संकेतक और निगरानी प्रणाली स्थापित करना शामिल है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग और समन्वय की भूमिका निभाएगा।

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