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दुनिया के 175 देशों के स्वास्थ्य की धड़कन बना भारत, हिमाचल के बद्दी में बना एशिया का सबसे बड़ा फार्मा हब

deltin33 1 hour(s) ago views 932
  
दुनिया के 175 देशों के स्वास्थ्य की धड़कन बना भारत (File Photo)






सुनील शर्मा, सोलन। जब दुनिया स्वस्थ समाज की तलाश में आगे बढ़ रही है, तब भारत अपने ज्ञान, उद्योग और कर्मठता से न केवल अपने नागरिकों की सेहत का संरक्षण कर रहा है,

बल्कि दुनिया के 175 देशों के स्वास्थ्य का भी भरोसेमंद आधार बन चुका है। हिमाचल प्रदेश का बद्दी आज इसी भारतीय सामर्थ्य का जीवंत प्रतीक है, जिसने एशिया के सबसे बड़े फार्मा हब के रूप में पहचान बनाकर यह सिद्ध कर दिया है कि भारत स्वास्थ्य के क्षेत्र में केवल आत्मनिर्भर ही नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्वकर्ता की भूमिका में है।

वर्ष 2003 में विशेष औद्योगिक पैकेज से शुरू हुई यह यात्रा बीते दो दशकों में उस मुकाम तक पहुंची है, जहां वैक्सीन को छोड़कर लगभग प्रत्येक जरूरी दवा का उत्पादन हिमाचल प्रदेश में हो रहा है और भारत की औषधीय शक्ति अपनी सीमाओं से परे मानवता की सेवा में लगी है।
\“वसुधैव कुटुंबकम केवल विचार नहीं...\“

बद्दी की यह कहानी केवल हिमाचल प्रदेश की नहीं, बल्कि उस भारत की है, जो स्वास्थ्य को राष्ट्रधर्म मानकर काम कर रहा है। यह उस भारतीय सोच का विस्तार है, जिसमें ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ केवल विचार नहीं, बल्कि दवा की प्रत्येक शीशी में साकार होता है-जहां भारत का श्रम, विज्ञान और संकल्प दुनिया को स्वस्थ रखने में लगा है और यही तंत्र के गढ़ की असली पहचान है।

एक समय था जब उद्योगों को तकनीकी स्टाफ और श्रमिकों के लिए दूसरे राज्यों की ओर देखना पड़ता था और स्थानीय भागीदारी पांच प्रतिशत तक सिमटी हुई थी। आज स्थिति बदली है।

लगभग 40 प्रतिशत तकनीकी और गैर तकनीकी स्टाफ हिमाचल से ही मिल रहा है। यह बदलाव केवल रोजगार का नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण का संकेत है, जहां स्थानीय प्रतिभा वैश्विक जरूरतों को पूरा कर रही है।

दवा उत्पादन के साथ-साथ प्रिंटिंग, पैकेजिंग और फायल निर्माण जैसे सहायक उद्योगों का प्रदेश में ही विकसित होना इस बात का प्रमाण है कि भारत स्वास्थ्य क्षेत्र में संपूर्ण इकोसिस्टम तैयार कर रहा है, जिससे गुणवत्ता, समय और लागत-तीनों में संतुलन बना है।

भारत की यह उपलब्धि इसलिए भी गौरवपूर्ण है, क्योंकि यहां बनी दवाएं विकासशील ही नहीं, बल्कि विकसित देशों के स्वास्थ्य तंत्र का भी भरोसा हैं। सस्ती, प्रभावी और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरने वाली भारतीय दवाओं ने यह सिद्ध किया है कि भारत केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य का संरक्षक है।

हालांकि, जीएसटी लागू होने के बाद कर छूट समाप्त होने से कुछ उद्योग बाहर गए और गुजरात जैसे राज्यों से प्रतिस्पर्धा बढ़ी, फिर भी हिमाचल का फार्मा आधार अपनी मजबूती और संभावनाओं के साथ खड़ा है।
बद्दी से इन देशों को होती है दवाओं की आपूर्ति

रूस, यूक्रेन, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली आदि देशों में निर्यात की जाती हैं। कुछ अफ्रीकी, दक्षिण-पूर्व एशियाई और मध्य-पूर्व के देशों में भी दवाओं की आपूर्ति की जाती है।

बद्दी के प्रमुख फार्मा उद्योग: सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड, डा. रेड्डीज लैबोरेट्रीज लिमिटेड, सिप्ला लिमिटेड, जायडस लाइफ साइंसेज, लूपिन लिमिटेड, इंटास फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, बायोकान लिमिटेड, एबाट हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड, ग्लेनमार्क फार्मा लिमिटेड, अल्केम लैबोरेट्रीज लिमिटेड, एलेम्बिक फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, अरिस्टो फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, टोरेंट फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड व मैक्लियोड्स फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड जैसे उद्योग दवा उत्पादन कर रहे हैं।
कच्चे माल का भी बड़ा वैश्विक केंद्र बनेगा

केंद्र और राज्य सरकारें दवा उद्योग को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास कर रही हैं। कच्चे माल के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी ठोस प्रयास हो रहे हैं। चीन पर निर्भरता घटाने के लिए बल्क ड्रग पार्क की स्थापना और नीति समर्थन यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल दवाओं का, बल्कि उनके कच्चे माल का भी बड़ा वैश्विक केंद्र बनेगा।

आज भले ही हिमाचल प्रदेश में दवा उत्पादन का मात्र दो प्रतिशत कच्चा माल उपलब्ध हो, लेकिन अगले पांच वर्षों में देश में 60 प्रतिशत से अधिक कच्चा माल स्वदेशी होने की उम्मीद भारत के स्वास्थ्य भविष्य को और सुदृढ़ बनाती है।


कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे, बिजली, परिवहन, औद्योगिक शेड, तकनीकी स्टाफ और लेबर की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इनसे दवा उत्पादन आसान हुआ है और हिमाचल प्रदेश के साथ भारत तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। -सतीश सिंघल, चेयरमैन हिमाचल ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन


ट्रिविया


भारत ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो प्रगति की है, वह केवल देशवासियों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए भरोसे का केंद्र बन चुकी है। यहां की चिकित्सा सुविधाएं, किफायती दवाएं और दक्ष मानव संसाधन भारत को वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर अग्रणी बनाते हैं। आज भारत ऐसा देश है, जहां उच्च गुणवत्ता का इलाज आम नागरिक की पहुंच में है और यही स्वस्थ समाज की सबसे बड़ी पूंजी है। -डॉ. देवी शेट्टी, प्रख्यात हृदय रोग विशेषज्ञ एवं संस्थापक, नारायण हेल्थ
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